निर्भया के दोषियों को फांसी देते वक्त कैसा था मौत का मंजर… पवन जल्लाद की आंखो देखी…

इम्पेक्ट डेस्क. एजेंसी।

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने के बाद पवन जल्लाद शुक्रवार रात आठ बजे मेरठ पहुंचा। आते ही उसने मेरठ जेल अधीक्षक को रिपोर्ट दी। सुरक्षा कारणों से उसे दिल्ली से पुलिस अभिरक्षा में मेरठ तक लाया गया।

पवन जल्लाद ने कहा कि चारों दोषियों के चेहरे पर काला कपड़ा ढका हुआ था। इसलिए यह नहीं बताया जा सकता कि किसकी क्या मनोदशा थी, लेकिन जैसे ही उन्हें फांसी के तख्ते पर लाया गया, वह सहमे हुए थे। चलने तक की स्थिति में नहीं थे। फांसी का फंदा डालते वक्त भी दोषी गिड़गिड़ा रहे थे…हमें माफ कर दो। पवन जल्लाद ने कहा कि घड़ी की सुईं में ठीक साढ़े पांच बजते ही जेल अधिकारियों ने फांसी का संकेत दिया और उसने लीवर खींच दिया। चारों दोषियों को दो तख्तों पर खड़ा किया गया। फांसी देने के लिए लीवर दो बार खींचना पड़ा। पवन ने कहा, मुझे तसल्ली है कि इतनी जघन्य वारदात करने वालों को मेरे हाथ से फांसी हुई।

फांसी के बदले 60 हजार
चारों को फांसी देने की एवज में मेहनताने के रूप में तिहाड़ जेल से पवन को 60 हजार रुपये का चेक मिला है। नियमानुसार एक फांसी पर जल्लाद को 15 हजार रुपये मिलते हैं। इस प्रकार उसे चारों की फांसी पर कुल 60 हजार रुपये मिले हैं। दिल्ली की कुछ एनजीओ ने भी पवन को आर्थिक सहायता दी है।

काम हो गया…हां
तिहाड़ जेल के तीन पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा में पवन को आठ बजे मेरठ जेल लेकर आए। जेल अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने पवन से पूछा ‘काम हो गया’ तो उसने ‘हां’ में जवाब दिया। जेल अधीक्षक के निर्देश पर मेरठ जेल के दो पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा में पवन को कांशीराम आवासीय कॉलोनी स्थित घर तक छोड़कर आए।

दोषियों के सामने भी हुआ ट्रायल
पवन के अनुसार, वह तीन दिन से तिहाड़ के गेस्ट हाउस में ठहरा हुआ था। उस रात तीन बजे ही वार्डर उसे उठाने पहुंच गया। लेकिन उसे कहां नींद आ रही थी। गेस्ट हाउस में पवन नहाया और हल्का-फुल्का नाश्ता किया। चार बजे वह फांसीघर में पहुंच गया। करीब आधे घंटे बाद चारों दोषियों को काला कपड़ा पहनाकर फांसीघर तक लाया गया। दोषियों के सामने ही अंतिम बार ट्रायल भी हुआ। साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। आधा घंटे तक चारों शव लटके रहे। इसके बाद डॉक्टरों ने जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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