इन पांच प्रमुख सेक्टरों में छूट से 45 फीसद अर्थव्यवस्था में शुरू हो जाएगा 20 अप्रैल से काम…

न्यूज डेस्क. नई दिल्ली।

लॉकडाउन 2.0 की नई गाइडलाइन में जिन सेक्टर्स को खोलने की तैयारी है, उनमें 65% लोग काम करते हैं। इस रियायत के बाद करीब 45% अर्थव्यवस्था में काम शुरू हो जाएगा। इससे जीडीपी को रोजाना हो रहे घाटे को कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना आगे भी चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। बता दे ंमोदी सरकार ने देश में संपूर्ण लॉकडाउन की मियाद 3 मई तक बढ़ा दी है। हालांकि 20 अप्रैल से कुछ जरूरी सेक्टर्स में शर्तों के साथ छूट दी गई है।

नोमुरा की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा, “हमारा अनुमान है कि लॉकडाउन में आंशिक छूट से मूल लॉकडाउन की तुलना में 20 अप्रैल के बाद लगभग 45% अर्थव्यवस्था फिर से शुरू हो सकती है। 24 मार्च से 14 अप्रैल तक शुरुआती लॉकडाउन में केवल 25% अर्थव्यवस्था चालू थी।”

1-गांवों और खेती-किसानी से जुड़ी सेवाएं और उद्योग

जीडीपी में 34.64% है योगदान कृषिक्षेत्र का का है। ईंट भट्टों, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस सर्विस, मछलियों का भोजन, मेंटेनेंस, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, हैचरी, कमर्शियल एक्वेरियम, मत्स्य उत्पाद, फिश सीड, चाय, कॉफी, रबर, काजू की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, दूध का कलेक्शन, प्रोसेसिंग, मक्का की मैन्युफेक्चरिंग व डिस्ट्रिब्यूशन का काम शुरू होगा।

50% कामगारों को राहत मिलेगी लेकिन नुकसान की भरपाई करना मुश्किल

कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि लॉकडाउन 2.0 में खेती और जुड़ी सेवाएं को शुरू करने से 50 फीसदी लोगों को काम मिलेगा क्योंकि आधी आबादी कृषि पर निर्भर है। सरकार रबी फसल की खरीदारी कर रही है। इससे किसानों के पैसा आएगा तो खरीदारी बढ़ेगी जो पूरी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद करेगा। हालांकि, इसके बावजूद भी किसानों को हुए नुकसान की भरपाई मुश्किल होगा।


2-रियल एस्टेट और सभी इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन शुरू करने की इजाजत

देश की जीडीपी में 7.74 फीसद योगदान भवन निर्माण और रियल स्टेट सेक्टर का है। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और सभी इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन शुरू करने की इजाजत मिली। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में भी सिर्फ उन्हीं को कंस्ट्रक्शन करने की छूट है, जहां साइट पर ही मजदूर उपलब्ध हैं। इससे प्रवासी कामगारों पर मंडरा रहा रोजगार का संकट काफी हद तक टल सकता है।

मजदूरों को बड़ी राहत

अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएडी राकेश यादव का मानना है कि रियल एस्टेट समेत सड़क, फ्लाइओवर आदि के निर्माण में रियायत देने से साइटों पर बैठे हजारों मजदूरों को बड़ी राहत मिलेगी। रियल एस्टेट को बड़ी राहत मिलेगी कि वह प्रोजेक्ट को बना कर दे पाएगा। इसके बावजूद, घरों की बिक्री बढ़ाना आसान नहीं होगा। सरकार को आम लोगों में विश्वास बहाली के लिए होम बायर्स से लेकर डेवलपर्स को रियायत देना होगा।

3- रिटेल : विशेष पास लेने से मुक्ति मिलेगी

कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि रिटेल की दुकानों को लॉकडाउन 2.0 में छूट मिलने से सबसे अधिक लाभ यह होगा कि उनको विशेष पास लेने से मुक्ति मिलेगी। इससे देशभर में करीब 20 से 25 लाख दुकानें खुल जाएंगी।  वहीं, ई-कॉमर्स को छूट देने से कोरोना फैलने का खतरा बढ़ेगा। सरकार को इस फैसले पर फिर से सोचने की जरूरत है। किराना, राशन की दुकानें, फल-सब्जी के ठेले, साफ-सफाई का सामान, पोल्ट्री, मीट, मछली और चारा बेचने वाली दुकानें खोलने की छूट मिलेगी। ई-कॉमर्स कंपनियां काम शुरू कर सकेंगी।

4- जरूरी सामान के निर्माण से जुड़े उद्योग

जीडीपी में 16.57 फीसद  योगदान जरूरी सामान बनाने वाले उद्योगों का  है। चिकित्सा उपकरण, आईटी हार्डवेयर, खनन, जूट उद्योग से जुड़ी कंपनियों में उत्पादन शुरू होगा। साथ ही स्पेशल इकोनॉमिक जोन, इंडस्ट्रियल टाउनशिप की भी कंपनियों को छूट मिलेगी। इन क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को रोजगार में फिर से लौटने का मौका मिलेगा। इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के अर्थशास्त्री अरुण कुमार के मुताबिक आम जनता की परेशानियां कम होंगी लेकिन उद्योग जगत की कठिनाइयों का भी संज्ञान लेना होगा।

5- डेटा, कॉल सेंटर और आईटी सेवा

सरकारी गतिविधियों के लिए काम करने वाले डेटा, कॉल सेंटर और आईटी सेवाओं वाले दफ्तर खुलेंगे। साथ ही इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मोटर मैकेनिक, कारपेंटर, कुरियर, डीटीएच और केबल सेवा देने वाले कर्मी भी अपनी सेवाएं शुरू कर पाएंगे।

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