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अमित शाह और छत्तीसगढ़…

– दिवाकर मुक्तिबोध। अमित शाह केन्द्र सरकार के ऐसे पहले गृह मंत्री हैं जो हर चार-पांच महीनों में छत्तीसगढ का फेरा लगाते हैं. उनके पहले केन्द्र में किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार रही हो , किसी भी गृह मंत्री को इतनी फुर्सत नहीं मिलती थी कि वे छत्तीसगढ जैसे छोटे प्रदेश का दर्जनों बार दौरा करें. अभी हाल ही में बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए अमित शाह रायपुर आए. यद्यपि भाजपा शासित एक छोटे विकासशील राज्य के प्रति गृह मंत्री का इतना प्रेम चकित करता है

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EditorialMuddaState News

बस्तर : बस छह माह और…

दिवाकर मुक्तिबोध। अब मात्र छह महीने रह गए हैं. मार्च 2026 तक छत्तीसगढ में नक्सलवाद और नक्सली अतीत में गुम हो जाएंगे! केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पिछले डेढ वर्ष में जितनी बार भी रायपुर आए, हर बार उन्होंने दोहराया कि नक्सलियों के खात्मे की डेड लाइन तय कर दी गई है – मार्च 26. इस समय सीमा के भीतर छत्तीसगढ में सक्रिय तमाम नक्सली व उनके नेता या तो मारे जाएंगे अथवा आत्मसमर्पण करने विवश हो जाएंगे. गृह मंत्री का यह संकल्प पूरा होता दिख रहा है. केन्द्रीय सुरक्षा

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D-Bastar DivisionEditorialMudda

ऑपरेशन कगार : शांति वार्ता क्यों न हो?

– दिवाकर मुक्तिबोध। तेलंगाना में नक्सलियों ने आगामी छह माह के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की है. क्या ऐसी कोई घोषणा माओवादी छत्तीसगढ में भी करेंगे जो भीषण रूप से नक्सल प्रभावित है ? शायद यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि सरकार सुलह वार्ता का संकेत न दें. छत्तीसगढ के गृह मंत्री विजय शर्मा पहले ही नक्सलियों की शांति वार्ता की पेशकश को ठुकरा चुके है. दरअसल 25 अप्रैल को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( माओवादी ) के उत्तर पश्चिम सब ज़ोनल ब्यूरो ने अपनी ओर

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साय सरकार का एक साल : चुनावी वायदों के व्यतिरेक विकास की योजनाएं कागजों पर और नक्सल मोर्चे पर बेहतर

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूर्ण हो गया. पिछले वर्ष इसी दिन साय ने मुख्य मंत्री पद की शपथ ली थी. उनके नेतृत्व में भाजपा सरकार का यदि एक साल का ट्रेक रिकॉर्ड देखा जाए तो वह सामान्य से अधिक नहीं है. दरअसल जिन वायदों के साथ भाजपा ने 2023 के विधान सभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था और सत्ता हस्तगत की थी, उनमें से कुछ योजनाएं सरकार ने तुरंत प्रारंभ कर दी जिसमे किसानों से बढी हुई दरों

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Nazriya

अब भारतीय जनता पार्टी की निगाह दिल्ली पर… दिल्ली की चुनौती बहुत बड़ी…

दिवाकर मुक्तिबोध। बीते एक वर्ष के दौरान पांच राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान,  हरियाणा तथा  महाराष्ट्र में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की निगाह दिल्ली पर टिक गई है जहां आम आदमी पार्टी की वजह से करीब डेढ दशक से उसके लिए सूखा पड़ा हुआ है तथा वह सत्ता से बाहर है. दिल्ली राज्य विधान सभा का कार्यकाल आगामी 23 फरवरी 2025 को पूरा हो जाएगा और इस बीच वहां विधान सभा चुनाव सम्पन्न हो जाएंगे. वर्ष 2015 से इस राज्य में आम आदमी पार्टी की

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