Friday, January 23, 2026
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अमित शाह और छत्तीसगढ़…

– दिवाकर मुक्तिबोध। अमित शाह केन्द्र सरकार के ऐसे पहले गृह मंत्री हैं जो हर चार-पांच महीनों में छत्तीसगढ का फेरा लगाते हैं. उनके पहले केन्द्र में किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार रही हो , किसी भी गृह मंत्री को इतनी फुर्सत नहीं मिलती थी कि वे छत्तीसगढ जैसे छोटे प्रदेश का दर्जनों बार दौरा करें. अभी हाल ही में बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए अमित शाह रायपुर आए. यद्यपि भाजपा शासित एक छोटे विकासशील राज्य के प्रति गृह मंत्री का इतना प्रेम चकित करता है

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EditorialMuddaState News

बस्तर : बस छह माह और…

दिवाकर मुक्तिबोध। अब मात्र छह महीने रह गए हैं. मार्च 2026 तक छत्तीसगढ में नक्सलवाद और नक्सली अतीत में गुम हो जाएंगे! केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पिछले डेढ वर्ष में जितनी बार भी रायपुर आए, हर बार उन्होंने दोहराया कि नक्सलियों के खात्मे की डेड लाइन तय कर दी गई है – मार्च 26. इस समय सीमा के भीतर छत्तीसगढ में सक्रिय तमाम नक्सली व उनके नेता या तो मारे जाएंगे अथवा आत्मसमर्पण करने विवश हो जाएंगे. गृह मंत्री का यह संकल्प पूरा होता दिख रहा है. केन्द्रीय सुरक्षा

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D-Bastar DivisionEditorialMudda

ऑपरेशन कगार : शांति वार्ता क्यों न हो?

– दिवाकर मुक्तिबोध। तेलंगाना में नक्सलियों ने आगामी छह माह के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की है. क्या ऐसी कोई घोषणा माओवादी छत्तीसगढ में भी करेंगे जो भीषण रूप से नक्सल प्रभावित है ? शायद यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि सरकार सुलह वार्ता का संकेत न दें. छत्तीसगढ के गृह मंत्री विजय शर्मा पहले ही नक्सलियों की शांति वार्ता की पेशकश को ठुकरा चुके है. दरअसल 25 अप्रैल को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( माओवादी ) के उत्तर पश्चिम सब ज़ोनल ब्यूरो ने अपनी ओर

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Nazriya

साय सरकार का एक साल : चुनावी वायदों के व्यतिरेक विकास की योजनाएं कागजों पर और नक्सल मोर्चे पर बेहतर

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूर्ण हो गया. पिछले वर्ष इसी दिन साय ने मुख्य मंत्री पद की शपथ ली थी. उनके नेतृत्व में भाजपा सरकार का यदि एक साल का ट्रेक रिकॉर्ड देखा जाए तो वह सामान्य से अधिक नहीं है. दरअसल जिन वायदों के साथ भाजपा ने 2023 के विधान सभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था और सत्ता हस्तगत की थी, उनमें से कुछ योजनाएं सरकार ने तुरंत प्रारंभ कर दी जिसमे किसानों से बढी हुई दरों

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Nazriya

अब भारतीय जनता पार्टी की निगाह दिल्ली पर… दिल्ली की चुनौती बहुत बड़ी…

दिवाकर मुक्तिबोध। बीते एक वर्ष के दौरान पांच राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान,  हरियाणा तथा  महाराष्ट्र में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की निगाह दिल्ली पर टिक गई है जहां आम आदमी पार्टी की वजह से करीब डेढ दशक से उसके लिए सूखा पड़ा हुआ है तथा वह सत्ता से बाहर है. दिल्ली राज्य विधान सभा का कार्यकाल आगामी 23 फरवरी 2025 को पूरा हो जाएगा और इस बीच वहां विधान सभा चुनाव सम्पन्न हो जाएंगे. वर्ष 2015 से इस राज्य में आम आदमी पार्टी की

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Articles By NameEditorial

रायपुर दक्षिण उपचुनाव : रिकॉर्ड के लिए नहीं प्रतिष्ठा के लिए लड़ाई…

दिवाकर मुक्तिबोध। रायपुर लोकसभा की बहुचर्चित विधान सभा सीट रायपुर दक्षिण के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित हो जाएंगे. यह सीट दोनों पार्टियों, कांग्रेस व भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति में नहीं है अलबत्ता प्रतिष्ठा की लड़ाई जरूर है. छत्तीसगढ में भारतीय जनता पार्टी मजबूत बहुमत के साथ सरकार में है इसलिए इस सीट को जीतने से उसकी राजनीतिक स्थिति पर विशेष फर्क नहीं पड़ेगा. विधान सभा में उसके विधायकों की संख्या में एक का इज़ाफा होगा लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण घटना  सांसद

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Nazriya

छत्तीसगढ़ उपचुनाव रायपुर दक्षिण : मुकाबला कांटे का…

दिवाकर मुक्तिबोध। रायपुर दक्षिण विधान सभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत संभावना पर शायद ही कोई यकीन करें लेकिन चमत्कार कही भी, कभी भी हो सकते हैं और राजनीति भी इससे परे नहीं है. कांग्रेस ने नये व युवा चेहरे के रूप में आकाश शर्मा को टिकिट देकर जो दावं खेला है यदि वह कारगर रहा तो रायपुर दक्षिण का परिणाम एक ऐसे कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो जाएगा जिसकी प्रतीक्षा कांग्रेस डेढ दशक से कर रही है. लेकिन क्या ऐसा होगा ? सोचना कठिन है. खासकर इसलिए क्योंकि

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EditorialPoliticsRaipur

उपचुनाव : रायपुर दक्षिण बृजमोहन के जिम्मे…

– दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर की दक्षिण विधान सभा सीट के लिए उपचुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है किंतु राज्य में सत्तारूढ भाजपा व प्रमुख विपक्ष कांग्रेस की जिस तौर तरीके से तैयारियां चल रही हैं, उसे देखते हुए सहज कहा जा सकता है कि यह उपचुनाव सर्वाधिक संघर्षपूर्ण चुनावों में से एक होगा. बीते वर्ष, 2023 में सम्पन्न हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने अपनी परम्परागत सीट रायपुर दक्षिण से बेमिसाल जीत दर्ज की थी. बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस के महंत रामसुंदर दास को

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NazriyaPolitics

रमेश बैस : अब आगे क्या ? बड़ा सवाल – “भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व उनके दीर्घ अनुभवों का भविष्य में कोई लाभ लेगा अथवा नहीं?”

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ की राजनीति की अज़ीम शख्सियत रमेश बैस अपने 46 – 47 वर्षों के अपने शानदार करियर के बाद ‘घर’ वापसी कर रहे हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल 29 जुलाई 2024 को समाप्त हो गया। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व उनके दीर्घ अनुभवों का भविष्य में कोई लाभ लेगा अथवा नहीं, इस बारे में पक्के तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उनके स्थान पर झारखंड के राज्यपाल सी वी राधाकृष्णन को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल बना दिया गया है। चूंकि 77 वर्षीय रमेश

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EditorialNaxalNazriya

छत्तीसगढ़ : नक्सल मोर्चे पर अंतिम लड़ाई! क्या बस्तर में रुक पाएगी हिंसा?

दिवाकर मुक्तिबोध। साल 2015 में बीबीसी से बातचीत के दौरान छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर रमनसिंह ने कहा था, ‘नक्सली धरती माता के सपूत हैं और उनका मुख्य धारा में बच्चों की तरह स्वागत होगा.’ उन्होंने यह बात वार्ता की संभावना के मद्देनजर कही थी. उनका यह कथन अनायास इसलिए याद आ रहा हैं, क्योंकि बस्तर में केन्द्र व राज्य सरकार का नक्सलियों के खिलाफ जो चौतरफा अभियान चल रहा है, उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा नक्सलियों को मुख्य धारा में लाना भी है. रमनसिंह की सरकार में सबसे ज्यादा नक्सली

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EditorialPolitics

छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के बाद बृजमोहन अग्रवाल की राजनीति का सवाल “जीत तो जायेंगे पर आगे क्या?”

-​ दिवाकर मुक्तिबोध। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में सात मई को छत्तीसगढ़ के सात निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के साथ ही राज्य की सभी 11 सीटों पर प्रत्याशियों का भाग्य इवीएम मशीनों में कैद हो चुका है. अब नतीजों की प्रतीक्षा है जो चार जून को मतगणना के साथ ही सामने आ जाएंगे. इन 11 सीटों में से जिन पांच पर परिणाम जानने की बेताबी है वे हैं- राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर, कोरबा तथा जांजगीर-चांपा. ये सभी हाई-प्रोफाइल सीटें हैं फिर भी राजनांदगांव, महासमुंद व कोरबा के मामले में जिज्ञासा

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Editorial

छत्तीसगढ़ में 2019 से अलग हैं ये चुनाव…

– दिवाकर मुक्तिबोध छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार में वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को जब रायपुर संसदीय सीट से टिकिट दी गई तो उसकी जमकर चर्चा हुई . यद्यपि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के इस फैसले को आश्चर्य के साथ नहीं देखा गया क्योंकि इस तरह के प्रयोग पिछले कुछ चुनावों में होते रहे हैं फिर भी जब बृजमोहन को टिकिट मिलने की घोषणा हुई तब तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आती गईं तथा यह मुद्दा काफी समय तक गर्म रहा. लेकिन धीरे-धीरे इस हाई-प्रोफाइल सीट पर चर्चा का बाज़ार ठंडा पड़ता

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Editorial

चुनाव विष्लेशण : अब की बार 400 पार का नारा और मोदी – गारंटी कितनी असरदार…

दिवाकर मुक्तिबोध। अठारहवीं लोकसभा के पहले चरण के मतदान के  लिए अब चंद घंटे ही शेष हैं। 19 अप्रैल को21 राज्यों के 102 सीटों पर मतदान  होगा। ये चुनाव पिछले तमाम  चुनावों की तुलना में अधिक संघर्षपूर्ण एवं आत्मकेन्द्रित होने के साथ ही देश की राजनीति की नई दिशा भी तय करते नजर आएंगे। इस बार के चुनाव मुख्यतः ईडी की अति सक्रियता, दुर्भावना के साथ विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस को सभी तरफ से घेरने की क़वायद, एक मुख्यमंत्री को चुनाव  प्रचार के मौलिक अधिकार से  वंचित रखने की कोशिश तथा भाजपा

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AAJ-KALEditorialPolitics

तो क्या आईना दिखा रहे हैं डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव…?

दिवाकर मुक्तिबोध. छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के पिछले साढ़े चार वर्षों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बाद यदि दूसरा कोई नेता या मंत्री विभिन्न कारणों से सर्वाधिक सुर्खियों में रहा है तो वे टी एस सिंहदेव हैं, सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अब डिप्टी सीएम जिन्हें यह कुर्सी तब मिली जब राज्य विधानसभा चुनाव के लिए महज तीन चार माह ही शेष रह गए थे। 17 दिसंबर 2018 को भूपेश बघेल के सरकार की कमान संभालने के पहले और बाद में प्रदेश की राजनीति में यह खबर तैरती रही कि

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बदल रही है छत्तीसगढ़ की राजनीति

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ की राजनीति में पिछले कुछ समय से जो घटनाक्रम चल रहा है, वह इस बात का संकेत है कि प्रदेश की दो बड़ी राजनीतिक ताकतें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जोरदार युद्धाभ्यास कर रही हैं। उनकी तैयारियां बताती हैं कि तीन महीने बाद होने वाला पांचवां चुनाव यकीनन पिछले चार के मुकाबले अधिक संघर्षपूर्ण और दिलचस्प होगा।  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने भारी भरकम विजय पायी थी। उसे अगले चुनाव में भी बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती है जिसका दबाव उस पर है। 90 सीटों की

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