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Thursday, March 12, 2026
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तो क्या आईना दिखा रहे हैं डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव…?

दिवाकर मुक्तिबोध. छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के पिछले साढ़े चार वर्षों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बाद यदि दूसरा कोई नेता या मंत्री विभिन्न कारणों से सर्वाधिक सुर्खियों में रहा है तो वे टी एस सिंहदेव हैं, सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अब डिप्टी सीएम जिन्हें यह कुर्सी तब मिली जब राज्य विधानसभा चुनाव के लिए महज तीन चार माह ही शेष रह गए थे। 17 दिसंबर 2018 को भूपेश बघेल के सरकार की कमान संभालने के पहले और बाद में प्रदेश की राजनीति में यह खबर तैरती रही कि

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आखिर क्यों हैं निशाने पर बस्तर के सबसे बुजुर्ग कांग्रेसी नेता अरविंद नेताम…

सुरेश महापात्र। आजादी से करीब पांच बरस पूर्व 1942 में आदिवासी नेताम परिवार में जन्में अरविंद नेताम की उम्र अब करीब 80 बरस की हो गई है। वे अविभाजित मध्य प्रदेश के सबसे बड़े आदिवासी नेता रहे। बस्तर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री का पद हासिल करने वाले इकलौते कद्दावर रहे। एक समय था जब छत्तीसगढ़ के शुक्ल बंधुओं श्यामाचरण और विद्याचरण के बराबर खड़े हो गए और दिग्विजय सिंह की सीएम की कुर्सी को चुनौती देते मध्यप्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री की दौड़ का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे

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#शब्द कितने मारक होते हैं… यह विनोद दुआ के जाने के बाद पता चला…

सुरेश महापात्र। सन् 1954 में जन्मे और सन् 2021 में अपनी मौत से पहले विनोद दुआ ने पत्रकारिता को ना जाने कितने शब्दों से सजाया। टीवी पत्रकारिता में उनके शब्द और शैली ने कम से कम दो पीढ़ी के पत्रकार तैयार किए। उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया में राइट विंग यानी भाजपा समर्थक उनके कहे एक शब्द का इस्तेमाल उनके ही खिलाफ कर रहे हैं। यह शब्द था ‘पाखंड’। वैसे यह शब्द अब पूरी तरह से राजनैतिक हो गया है। इस शब्द का इस्तेमाल पत्रकार विनोद दुआ ने द

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अजीत जोगी के बाद…?

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनके नेतृत्व में गठित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का भविष्य क्या होगा। कांग्रेस से अलग होने के बाद जोगी ने तीन वर्ष पूर्व नई प्रादेशिक पार्टी बनाई थी जिसकी पहिचान राज्य की तीसरी राजनीतिक शक्ति के रूप में हुई और इसने काफी हद तक इसे सिद्ध भी किया। वर्ष 2018 के अंत में हुआ विधान सभा चुनाव उसका पहिला चुनाव था जिसमें उसके पाँच उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। बसपा से उसका चुनावी

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दंतेवाड़ा में भाजपा जहां से चली थी… वहीं ना पहुंच जाए…

अजय सरस्वती श्रीवास्तव। दन्तेवाड़ा जिले में बीजेपी जिन परिस्थितियों में स्थापित हो पाई थी वो बेहद ही कठिन थी, स्व.महेन्द्र कर्मा जैसा लोकप्रिय और दिग्गज नेता वे जब अपनी राजनीति के पूर्ण वेग में थे तब दन्तेवाड़ा में बीजेपी का झंडा उठाने वाले गिने चुने लोग ही थे। बाद में दन्तेवाड़ा बीजेपी का जिला संगठन इतना मजबूत हो गया कि एक पंचायत सचिव को दिग्गज महेंद्र कर्मा के आगे खड़ा कर चुनाव जीतवा ले गया… सत्ता के 15 सालों में सत्ता के दीमक ने छत्तीसगढ़ बीजेपी संगठन की बुरी तरह

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