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Thursday, March 12, 2026
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Articles By Namesafarnama

मिलना एक महान रचनाकार से…

एक मार्च को शैलेन्द्र नगर में विनोद जी के घर में उनसे मुलाकात हुई। उनका चेहरा देखा तो अनायास मुझे 60-62 वर्ष पूर्व के वे विनोद जी याद आ गए जिन्हें मैं राजनांदगांव के दिग्विजय कॉलेज परिसर के अपने मकान की विशाल खिड़की के पाटे पर बैठकर अपने घर की ओर पैदल आते देखा करता था। उन दिनों वे जबलपुर के कृषि महाविद्यालय के छात्र थे और जैसा कि उन्होंने अनेक बार अपने संस्मरणों में जिक्र किया है, वे नये-नये युवा कवि थे, कविताएं लिख रहे थे। छुट्टियों में जब

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तेज बाजारवाद व तरह-तरह के दबाव के बीच मूल्यपरक पत्रकारिता के लिए रास्ता बनाना अत्यधिक कठिन… दिवाकर मुक्तिबोध। कुछ यादें कुछ बातें-18

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक दिवाकर जी… ने पत्रकारिता को पढ़ा है, जिया है और अब भी जी रहे हैं… वे अपना सफ़रनामा लिख रहे हैं… कुछ यादें कुछ बातें-18 -दिवाकर मुक्तिबोध। ललित सुरजन मुझसे उम्र में कुछ वर्ष ही बड़े थे। मैं बीएससी कर रहा था, वे एमए। लेकिन उनका बौद्धिक स्तर बहुत ऊंचा था। जबकि मैं इस मामले में उनसे बहुत बौना। क्या हिंदी, क्या अंग्रेजी, दोनों पर उनकी पकड़ जबरदस्त थी। चूंकि कालेज की पढाई के साथ साथ उन्होंने देशबंधु का काम भी

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अखबारों में काम करने से हिंदी सुधरी, भाषा शैली भी ठीक हुई… अनुभव बढ़ा व घटनाओं को पत्रकार की नजर से देखने-समझने की दृष्टि भी विकसित हुई… दिवाकर मुक्तिबोध। कुछ यादें कुछ बातें-17

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक दिवाकर जी… ने पत्रकारिता को पढ़ा है, जिया है और अब भी जी रहे हैं… वे अपना सफ़रनामा लिख रहे हैं… कुछ यादें कुछ बातें-17 -दिवाकर मुक्तिबोध। पत्रकारिता को पेशा बनाऊँगा, सोचा नहीं था। कह सकते हैं इस क्षेत्र में अनायास आ गया। जब भिलाई से हायर सेकेंडरी कर रहा था, तीन बातें सोची थीं। एक -भिलाई स्टील प्लांट में नौकरी नहीं करूंगा, दो- केमिस्ट्री में एमएससी करूँगा और तीसरी बात- शैक्षणिक कार्य नहीं करूंगा। पर जैसा सोचा था, वैसा नहीं

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मुझे पूरा भरोसा था कि नौकरी बजाते हुए मै बीएससी फायनल की परीक्षा पास कर लूंगा। लेकिन मैं मन का कच्चा था… अपने से ही धोखा खा गया… दिवाकर मुक्तिबोध… कुछ यादें कुछ बातें — 16

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक दिवाकर जी… ने पत्रकारिता को पढ़ा है, जिया है और अब भी जी रहे हैं… वे अपना सफ़रनामा लिख रहे हैं… कुछ यादें कुछ बातें-16 -दिवाकर मुक्तिबोध। मैं बीएससी फायनल में पहुंचा ही था कि मुझे सरकार के शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। शिक्षक की। लोअर डिवीजन टीचर। खम्हारडीह शंकर नगर के मिडिल स्कूल में। यह स्कूल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल के निवास से लगा हुआ था। यह बात है 1969-70 की। अब साइंस कालेज में पढाई और

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मुझे पूरा भरोसा था कि नौकरी बजाते हुए मै बीएससी फायनल की परीक्षा पास कर लूंगा। लेकिन मैं मन का कच्चा था… अपने से ही धोखा खा गया… दिवाकर मुक्तिबोध… कुछ यादें कुछ बातें — 15

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के आधार स्तंभों में से एक दिवाकर जी… ने पत्रकारिता को पढ़ा है, जिया है और अब भी जी रहे हैं… वे अपना सफ़रनामा लिख रहे हैं… कुछ यादें कुछ बातें-15 -दिवाकर मुक्तिबोध। अपने से शुरू करता हूं, दो चार छोटी मोटी बातें। वैसे बचपन की अनेक घटनाएं स्मृतियों में दर्ज हैं , पर एक रह रहकर याद आती रहती है। घटना नागपुर की। मैं प्राइमरी कक्षा का छात्र था। हम मोहल्ला गणेश पेठ में रहते थे। एक दिन एक फेरीवाले ज्योतिषी महाराज घर के दरवाजे पर

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