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छत्तीसगढ़ में अमित शाह: केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, माओवादियों द्वारा हिंसा छोड़ने और मार्च 2026 तक आत्मसमर्पण करने के बाद ही बातचीत होगी

रश्मि द्रोलिया की रिपोर्ट। टाइम्स आफ इंडिया के लिए। रायपुर. वरिष्ठ माओवादी कमांडरों को सबसे पहले हिंसा छोड़नी होगी और मार्च 2026 तक आत्मसमर्पण करना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार देर शाम नया रायपुर पहुँचने के तुरंत बाद कहा कि हम जनहित में बातचीत पर तभी विचार कर सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि सशस्त्र कार्यकर्ताओं को या तो हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होना होगा या फिर तीव्र अभियानों का सामना करना होगा। शाह ने नया रायपुर में टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में

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बीहड़ बस्तर में बदल रही तस्वीर… ‘जगरगुंडा’ दो दशक तक पूरी दुनिया से कटे एक मायूस गांव को खुशनुमा बनाने की कोशिश में सरकार…

सुरेश महापात्र। कभी जंगल के भीतर पगडंडी नुमा सड़क पर चलने वाले आदिवासी अब पक्की सड़क पर चार पहिया से चलते दिखने लगे हैं। यह दृश्य अब दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से नकुलनार और यहां से पालनार होकर अरनपुर की राह पहुंचते—पहुंचते लगने लगता है। कितनी बदल गई है यहां की तस्वीर।  नकुलनार से हमने पालनार की राह पकड़ ली। नकुलनार से करीब 13 किलोमीटर की दूर पर पालनार की पहली बस्ती है। जो एक प्रकार से माओवादियों के गढ़ का अंतिम मुहाना रहा जहां तक पहुंच कभी रूकी नहीं।  Read

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नहीं लगता शांति वार्ता की जरूरत है… बशर्ते?

विशेष टिप्पणी। सुरेश महापात्र। बस्तर में माओवादियों के साथ संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। इसमें ना जाने कितने लोगों की मौत दर्ज है। किसे शहीद कहें और किसे मौत? यह भी बड़ा सवाल रहा है। चार दशक पुराने इस माओवादी इतिहास में बस्तर एक अघोषित युद्ध क्षेत्र की तरह ही रहा है। अब पहली बार ऐसा साफ दिखाई दे रहा है कि बस्तर में लंबे समय तक बैकफुट पर रहे सशस्त्र बलों का आत्मबल कामयाबी से बढ़ा है। हर उस इलाके में सशस्त्र बलों का अब दबदबा साफ दिखाई

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अमृत सरोवर का अमृत अफसर ले गये, बच गयी धूल… 4 करोड़ के 28 तालाब, सारे सूखे, बन गये खेल मैदान…

अभिषेक भदौरिया. दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा जिले में राज्य के बजट और डीएमएफ ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त राशि में भी बड़ी गड़बड़ी की जाती है। ऐसा इसलिये कहा जा सकता है क्योंकि यहां मनरेगा के तहत 28 तालाबों का निर्माण अब तक कराया गया है। इनमें से 90 फीसदी तालाबों में एक बूंद भी पानी नहीं है। हालात ऐसे हैं कि अब इन तालाबों में बच्चे सायकल चला रहे हैं तो कहीं क्रिकेट खेल रहे हैं। जानकर आश्चर्य होगा कि इन 28 तालाबों के लिये 3 करोड़ 95 लाख

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स्कूल शिक्षा विभाग में प्रमोशन पदस्थापना पेंडिंग… समीक्षा बैठक हुई पर प्रमोशन पर फैसला नहीं… पूरा सिस्टम कोलेप्स

इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर। छत्तीसगढ़ में करीब पांच लाख शासकीय अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं इसमें से आधा यानी करीब ढाई लाख अकेल शिक्षा विभाग के अधीन हैं। यानी स्थापना व्यय का करीब आधा हिस्सा केवल स्कूल शिक्षा विभाग के खाते में जाता है। ऐसे में इस विभाग में होने वाली हर हलचल पर पूरे प्रदेश की निगाह लगी रहती है। यदि जमीन पर देखा जाए तो वर्षों से प्रमोशन और पोस्टिंग के अटके होने के कारण स्कूल शिक्षा विभाग में सिस्टम करीब—करीब कोलेप्स होने की कगार पर है। Read moreएंटी

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दंतेवाड़ा के अति नक्सल प्रभावित मड़कामी रास के उस सड़क की पूरी कहानी जहां भ्रष्टाचार की सड़क बिछा दी गई… अब जाकर अफसर, ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई…

इम्पेक्ट न्यूज। दंतेवाड़ा। दिसंबर 2022 की बात है बस्तर इम्पेक्ट ने तब दंतेवाड़ा के कुछ ठेकेदारों के एक शिकायती पत्र को प्रकाशित किया था जिसमें तत्कालीन कलेक्टर विनीत नंदनवार को शिकायत की गई थी। इस पत्र में ठेकेदारों ने इसी मड़कामी रास की सड़क के लिए जिला निर्माण समिति की निविदा में लगाए गए एक शर्त का विरोध किया था। दरअसल इस ​निविदा में पहली बार यह शर्त रखी गई थी कि मड़कामी रास की सड़क के लिए ठेकेदार के पास सात किलोमीटर के अंदर डामर प्लांट होना जरूरी है।

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लोहारीडीह : मौतों के तांडव से लेकर सरकार के मरहम तक की कहानी… कांग्रेस के दौर में बिरनपुर के मुकाबले लोहारीडीह में विष्णु सरकार का रवैया…

सुरेश महापात्र। छत्तीसगढ़ में कवर्धा जिले में जमीन विवाद की रंजिश से शुरू हुई समस्या मौत और हत्या से आगे बढ़ते हुए अब व्यापक रूप ले चुकी है। छत्तीसगढ़ में हालिया मॉब लिंचिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है। बड़ी बात यह है कि यह मॉब लिंचिंग एक ही समाज के दो समूहों के बीच सामने आई है। पहली घटना सुकमा जिले में टोनही के नाम पर हुई जिसमें पांच लोगों की मौत हुई। बस्तर में अपनी तरह की यह पहली वारदात है। वहीं छत्तीसगढ़ के दूसरे कोने में कवर्धा

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शक्तिपीठ क्षेत्र में पब्लिक सर्विस को सुदृढ़ करेगा दंतेवाड़ा धाम प्रबंधन सोसायटी…

इम्पेक्ट न्यूज। दंतेवाड़ा। बीते 08 अप्रैल 2024 को दंतेवाड़ा जिले में पहली बार दंतेवाड़ा धाम प्रबंधन समिति के नवीन प्रारूप को लेकर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने जानकारी सार्वजनिक की थी। तीन माह बाद इस योजना को मूर्तरूप देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके तहत जिला प्रशासन द्वारा दंतेवाड़ा धाम प्रबंधन सोसायटी के माध्यम से जिले में संचालित हो रहे समस्त शासकीय परिसम्पतियों एवं संसाधनों के रख रखाव करने के साथ-साथ उन्हें बहुउद्देशीय तथा उन्हें आम जनों के लिए अधिक उपयोगी बनाए जाने की योजना है। दरअसल दंतेवाड़ा

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दो महिलाओं को एक ही खाता आबंटित कर दिया बैंक ने, कई साल तक चलता रहा लेन-देन दक्षिण बस्तर का अजीब मामला…

एक खाता, दो हमनाम दावेदार, अजब बैंक का गज़ब कारनामा (एक्सक्लूसिव ) शैलेन्द्र ठाकुर। दंतेवाड़ा। आपने एक संयुक्त बैंक खाते में दो या अधिक खातेदारों का नाम सुना व देखा होगा, लेकिन एक ही सिंगल खाता के लिए दो हमनाम खातेदारों को अलग-अलग पासबुक, वह भी सचित्र जारी करने का मामला पहली बार सुना होगा। जी हां । ऐसा अजीब मामला दंतेवाड़ा में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा 1207 में सामने आया है। इस बैंक ने पंडेवार निवासी महिला श्यामबती पति उमाशंकर, खाता क्रमांक 7702642066-2 के नाम से दोनों

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एर्राबोर हादसे के 18 साल बाद एक डाक्यूमेंट्री ERRABORE MASSACRE 2006 ने पूरा सच उजागर किया…

इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर। आज से करीब दो दशक पहले बस्तर में माओवादियों के खिलाफ आदिवासियों के स्वस्फूर्त विरोध के अभियान सलवा जुड़ूम के दौर में बहुत सी घटनाएं दर्ज हैं। इसी दौर में वर्ष 2006 में अब सुकमा जिला के एर्राबोर कैंप में माओवादियों ने एक बड़ा हमला किया था। यह हमला सशस्त्र पुलिस बल के खिलाफ ना होकर निरीह आदिवासियों के अस्थाई आवास पर किया गया। पूरे कैंप में मार—काट मचाते हुए ताड़ के पत्तों से बने आदिवासियों के झोपड़ियों को माओवादियों ने फूंक दिया। इस हमले में करीब

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सिस्टम ने नहीं सुनी तो दशरथ बन गए धनगोल के बाशिंदें! ताड़ वृक्ष के तनों से तान दी जुगाड़ की पुलिया…

पी रंजन दास। बीजापुर। ताड़ के तनों से तान दी जुगाड़ की पुलिया ! बिहार के दशरथ मांझी पर बनी फिल्म मांझी द माउंटेन मेन आपने जरूर देखी होगी। फिल्म के आखिरी दृश्य में दशरथ कहते है कि भगवान के भरोसे ना बैठे, क्या पता भगवान हमारे भरोसे बैठा हो। फिल्म के इस डॉयलाग से ठीक इत्तफाक रखती है बीजापुर के धनगोल पंचायत की कहानी। जहां प्रशासन से एक अदद पुलिया की फरियाद करते थक चुके ग्रामीण अब प्रशासन से उम्मीद से छोड़ बारिश में पेश आने वाली कठिनाईयों से

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20 साल बाद बजेगी स्कूल की घंटी, माओवाद प्रभावित मुदवेंडी में…

पी रंजन दास। बीजापुर । 20 सालों से शिक्षा के प्रकाश से वंचित मुदवेंडी गांव में नए शिक्षा सत्र में स्कूल की घंटी बजनी शुरु हो जाएगी। सड़क और सुरक्षा के विस्तार के बाद जिला प्रशासन के प्रयासों से अब मुदवेंडी के बच्चों को शिक्षा के अधिकार का लाभ मिलेगा और अशिक्षा के अंधकार से मुक्ति मिलेगी। नियद नेल्लानार के जरिये विकास की पहूँच और स्कूल वेंडे वर्राट पंडूम से शिक्षा की मुख्यधारा में लौटने की अपील का असर अब माओवाद प्रभावित इलाकों में दिखने लगा है। 20 सालों  से

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नक्सलगढ़ में बच्चों को भाया “तंबू क्लासरूम”! बंदूक की जगह छड़ी थाम अफसर-जवान जगा रहे शिक्षा की अलख…

बीजापुर के पालनार गांव से आई सुखद तस्वीर पी रंजन दास। बीजापुर। छत्तीसगढ़ के घोर माओवाद प्रभावित बीजापुर के पालनार गांव में सीआरपीएफ की एक तंबु वाली क्लासरूम मिसाल बनकर उभरी है। सीआरपीएफ ने गांव के बच्चों का बेहतर भविष्य गढ़ने के उद्देश्य टेंट को ही क्लासरूम बना दिया है। जिसमें अफसर से लेकर जवान गांव के बच्चों को ककहरा से लेकर अंकगणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषय पढ़ा रहे हैं। सीआरपीएफ 202 कोबरा क्लासरूम का संचालन कर रही है। जिसे कोबरा क्लासेस का नाम भी दिया गया है। बच्चों के

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जो कभी माओवादी दस्ते का हिस्सा थी अब वह हैं देश सेवा के लिए महिला कमांडो…

पी रंजन दास। बीजापुर। सियारी के पत्तों से पत्तल और दोना, चूल्हा-चौकी के साथ बस्तर की फिजा में मांदर की थाप और बांसूरी की सुरीली आवाज को लौटाने, यहां शांति बहाली के लिए महिलाएं भी पुरूषों के साथ कदम से कदम मिलाकर नक्सलियों को उनके ही गढ़ में मुंहतोड़ जबाव दे रही हैं। बस्तर में इस समय नक्सलियों के खिलाफ छिड़ी निर्याणक जंग में महिला कमांडोज को भी युद्धग्रस्त इलाकों में उतारा गया है। इनमें समर्पित महिला माओवादी भी शामिल है जो कल तक लोकतंत्र की मुखालफत में हथियार लेकर

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…तो फिर दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में नही गूंजेगी बच्चों की किलकारियां!

विनोद सिंह. दंतेवाड़ा। जिला अस्पताल दंतेवाड़ा से प्रसूति एवम शिशु विभाग को गीदम MCH में शिफ्टिंग की तैयारी चल रही है।अगर खबर सही है तो कुछ दिनों बाद जिला अस्पताल में बच्चों की किलकारियां सुनाई नही पड़ेगी।अगर आपके बच्चे को बुखार भी आया तो उसके इलाज के लिए गीदम MCH जाना पड़ेगा। जिला चिकित्सा विभाग में पिछले एक साल से एक खिचड़ी पक रही है।तत्कालीन जिला कलेक्टर ने लगभग 1 वर्ष पहले जिला हस्पितल के अनिवार्य फैकल्टी प्रसूति एवं  शिशु विभाग को गीदम MCH में शिफ्ट करने की योजना बनाई

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