दंतेवाड़ा में अमित शाह का दौरा – नक्सलवाद के खात्मे और विकास की नई उम्मीद…
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सुरेश महापात्र।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज 5 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का दौरा न केवल बस्तर क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।
यह दौरा नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई और प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के केंद्र सरकार के संकल्प को रेखांकित करता है।
इससे पहले वर्ष 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दंतेवाड़ा जिले के प्रवास पर आए थे उन्होंने विश्वास दिलाया था कि बस्तर जल्द ही यहां की ज़मीनी समस्याओं से मुक्त होगा। अब नौ बरस बाद यह साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है कि पाँच दशक से चल रही समस्या का निराकरण तेजी के साथ हो रहा है।
दंतेवाड़ा, जो लंबे समय से नक्सल हिंसा का केंद्र रहा है, अब शांति और समृद्धि की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन का परिणाम भी है। दंतेवाड़ा जिले में लंबे समय के बाद ईमानदार प्रशासनिक व्यवस्था ने आम आदिवासियों के लिए विश्वास की जमीन तैयार की है।
शाह का यह दौरा, खासकर बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन समारोह में उनकी भागीदारी, स्थानीय संस्कृति को सम्मान देने के साथ-साथ क्षेत्र की जमीनी हकीकत को समझने का एक प्रयास है।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई
केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, और इस दिशा में छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
आंकड़े बताते हैं कि 2025 में अब तक छत्तीसगढ़ में 130 से अधिक नक्सली मारे गए हैं, जिनमें से 110 से ज्यादा बस्तर संभाग के सात जिलों में ढेर किए गए। इसके अलावा, 105 से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 164 ने आत्मसमर्पण किया है। 2024 में भी 290 नक्सलियों को मार गिराया गया, 1,090 को गिरफ्तार किया गया, और 881 ने हथियार डाल दिए।
यह प्रगति सरकार की त्रिस्तरीय रणनीति का नतीजा है: नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करना, हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, और प्रभावित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना।
दंतेवाड़ा में शाह का दौरा इस रणनीति को और मजबूती देगा। उनकी उपस्थिति न केवल सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों में भी यह संदेश देगी कि सरकार उनके साथ है। नक्सल प्रभावित परिवारों से उनकी मुलाकात एक संवेदनशील कदम है, जो यह दर्शाता है कि सरकार न केवल हिंसा को खत्म करना चाहती है, बल्कि पीड़ितों के दर्द को समझकर उनके पुनर्वास के लिए भी प्रतिबद्ध है।
विकास के नए द्वार
नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए हिंसा के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों पर जोर देना जरूरी है, और बस्तर में यह रणनीति प्रभावी साबित हो रही है। सड़कें, स्कूल, अस्पताल, और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसमें नियद नेल्लानार योजना का क्रियान्वयन महत्वपूर्ण है।
सरकार का मानना है कि जब स्थानीय लोग विकास का लाभ देखते हैं, तो वे नक्सलवाद की ओर आकर्षित होने के बजाय मुख्यधारा से जुड़ते हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, नौकरी, और शिक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान करने वाली नई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं। हाल के महीनों में आत्मसमर्पण की संख्या में वृद्धि इसका प्रमाण है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि प्रगति सराहनीय है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बाकी हैं। नक्सलवाद का प्रभाव भले ही कम हुआ हो, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बस्तर के सुदूर इलाकों में अभी भी कुछ नक्सली समूह सक्रिय हैं, और इनके खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों को लगातार जोखिम उठाना पड़ रहा है।
इसके अलावा, विकास कार्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में प्रशासनिक बाधाएं और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे, ताकि नक्सलवाद के लिए कोई जमीन न बचे।
नई उम्मीद की किरण
अमित शाह का दंतेवाड़ा दौरा नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम प्रहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दौरा न केवल सुरक्षा और विकास की रणनीतियों को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों में विश्वास भी जगाएगा।
पंडुम महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी भागीदारी यह संदेश देती है कि सरकार बस्तर की पहचान और परंपराओं का सम्मान करती है। यह एक अवसर है कि दंतेवाड़ा और बस्तर नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर शांति, समृद्धि, और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बनाएं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शाह के दौरे के बाद दंतेवाड़ा में विकास और शांति की यह प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। सरकार और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से ही बस्तर नक्सल मुक्त होकर एक नई सुबह की ओर बढ़ सकता है।