शरीर में कील चुभोकर 50 फीट की ऊंचाई पर घूम शिव की अराधना… ऐसे होती है ‘चड़क पूजा’…
इम्पैक्ट डेस्क.
मूलवासियों के प्रमुख त्योहारों में से एक चड़क पूजा की शुरुआत 13 अप्रैल को हो रही है। 13 को संजोत (नहाय खाय), भोगतिया स्नान, पूजा और पुष्पांजलि के साथ भोक्ता व्रत का संकल्प लेंगे। पूजा को लेकर सभी पूजा कमेटियों की तैयारी अंतिम चरण में है। भेलाटांड़, मनईटांड़ और धोखरा में भोक्ता मेला का आयोजन होगा। सरायढेला शिव मंदिर कमेटी चड़क का आयोजन करती है।
अद्भुत होता है ढाक शुद्धि अनुष्ठान
भेलाटांड़ चड़क पूजा समिति के शक्ति महतो ने बताया कि 14 अप्रैल को चौका उपवास रहेगा अर्थात चूल्हा नहीं जलेगा। धूरा पर घुमने वाले भोक्ता उपावास में रहते हैं। इसी दिन रात्रि में पूजा होगी। संध्या 6 बजे भोक्तिया स्नान होगा। इसके बाद पूजा व पुष्पांजलि होगी। रात के 11 बजे ढाक शुद्धि की जाएगी। ढाक शुद्धि का अनुष्ठान भी अद्भुत होता है। इसके लिए रात में सभी भोक्ता शिव मंदिर के चारों ओर सोते हैं। ढाक पूजन के बाद मंत्रोच्चार के साथ शिव की आराधना होती है। रात के 12 बजे छऊ नृत्य का आयोजन होगा। इस दौरान भोक्ता उपवास में ही रहेंगे।
50 फीट ऊपर धुरी पर घूमेंगे भोक्ता
भूखे रहकर ही अगले दिन पोईला वैशाख पर खूंटा गाड़ कर सभी भोक्ता 50 फीट उपर धुरी पर घुमेंगे। इस दौरान शरीर में कील चुभोकर ऊंचाई पर चारों ओर घुमकर शिव को प्रसन्न करेंगे। रात्रि में पूजा के बाद झारखंडी लोक संस्कृति व भक्ति जागरण का आयोजन होगा। 16 को नारता पूजा (पारण) होगी।