#between naxal and force सलवा जुड़ूम : बस्तर के रक्त रंजित इतिहास का वह दौर जब दोनों तरफ से निशाने पर रहे आदिवासी…

सुरेश महापात्र। युवाओं की इस भीड़ में कितने माओवादी प्लांट हो रहे थे इसका अंदाजा किसी को नहीं था। …आगे पढें 19 जून को

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#between naxal and force माओवादियों पर दबाव और सलवा जुड़ूम का प्रभाव…

सुरेश महापात्र। घटनाओं के इसी क्रम के बाद आदिवासियों का आक्रोश पुलिस और माओवादियों दोनों के लिए उबलने लगा। (4) आगे पढ़ें दंतेवाड़ा जिले

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#between naxal and force आदिवासियों का आक्रोश कैसे सलवा जूड़ूम में हुआ तब्दील…

सुरेश महापात्र।  पर एक बड़ा सवाल है आखिर शांत दिख रहे दक्षिण बस्तर में सब कुछ यकायक कैसे बदलने लगा… (3)  से आगे… बस्तर

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#between naxal and force सोनी सोरी शिक्षिका से माओवादी समर्थक…

सुरेश महापात्र। वे उन स्कूल बिल्डिंग को भी ध्वस्त करने लगे जिनमें फोर्स के ठहरने का इंतजाम हो सकता था। (2) से आगे… सोनी सोरी

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#between naxal and force एस्सार का पाइप लाइन और माओवादियों का दबाव…

सुरेश महापात्र। हर ऐसे व्यक्ति को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है जिसने भी दोनों पक्षों के बीच निष्पक्ष होने की नाकाम कोशिश की है।

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