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Tuesday, March 10, 2026
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District Bastar (Jagdalpur)

CRPF बस्तर में करेगा भर्ती, 10वीं नहीं अब 8वीं पास युवा बनेंगे कांस्टेबल… पूर्व CM रमन बोले- नक्सलवाद को खत्म करने में मिलेगी मदद… भर्ती के बाद सीआरपीएफ कराएगी 10वीं की पढ़ाई…

इम्पैक्ट डेस्क.

छत्तीसगढ़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कांस्टेबल भर्ती में शैक्षिक योग्यता 10वीं से घटाकर अब आठवीं कर दिया गया है। आठवीं पास युवा भी सीआरपीएफ के जवान बन सकेंगे। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के युवाओं को रोजगार से जोड़ने यह फैसला लिया है। सीआरपीएफ ने दक्षिण बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में 400 जवानों की भर्ती का फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने इस फैसले को मंजूरी भी दे दी है। पूर्व सीएम डॉ. रमन ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय आने वाले समय में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने में मिल का पत्थर साबित होगा।  

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आदिवासी भाई-बहनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने मोदी सरकार निरंतर काम कर रही है। सेंट्रल कैबिनेट द्वारा सीआरपीएफ कांस्टेबल भर्ती में छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा व सुकमा जिले के आदिवासी युवकों के लिए शैक्षणिक योग्यता में छूट को मंजूरी दी है। अब 10वीं के स्थान में आठवीं पास युवा भी योग्य होंगे। केंद्र सरकार का यह निर्णय नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने में मिल का पत्थर साबित होगा। दरअसल, CRPF ने वर्ष 2016-17 में राज्य के 4 जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा में आदिवासियों के बस्तरिया बटालियन का गठन किया था। आदिवासी युवक दसवीं की अनिवार्य योग्यता को पूरा नहीं कर पाए थे, जिसके कारण योजना का अधिक फायदा नहीं मिल सका था।

भर्ती के बाद सीआरपीएफ कराएगी 10वीं की पढ़ाई
बता दें कि पीएम मोदी का अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा यह निर्णय लिया गया है। गृह मंत्रालय बस्तरिया युवाओं को फिजिकल स्टैंडर्ड में भी छूट देगी। इस विशेष अभियान के तहत राज्य के नक्सल प्रभावित 3 जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा के आदिवासी युवाओं की भर्ती की जाएगी। सीआरपीएफ इन युवाओं को ट्रेनिंग और प्रोबेशन के दौरान शिक्षा भी प्रदान करेगा। भर्ती के बाद 10वीं तक की शिक्षा दी जाएगी और उसके बाद इन्हें स्थायी कर दिया जाएगा। उन्हें शिक्षा प्रदान करने के लिए मान्यता प्राप्त स्कूलों में रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। सीआरपीएफ में स्थानीय युवाओं की भर्ती से नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों को मदद भी मिलेगी। स्थानीय लोग क्षेत्र और बस्तरिया भाषा में ग्रामीणों से संवाद कर सकेंगे.