तो यह तय करना कठिन होगा कि उन्होंने न्याय किया या इन्होंने… इसलिए कृपया फर्जी मुठभेड़ों को न्याय मत मानिए…
सुरेश महापात्र। छत्तीसगढ़ में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की सैकड़ों कहानियों का सच किसी को अब तक पता नहीं। सैकड़ों माओवादियों की मौत मुठभेड़ के नाम दर्ज हैं। वहीं कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें ना तो मुठभेड़ दर्ज किए गए और ना ही किसी पर आरोप तय किया जा सका। मौतें सहज तौर पर आदिवासियों की ही हुई। मारने वाले वर्दीदारी ही थे। वे पुलिस की वर्दी में थे या माओवादियों की वर्दी में इस बहस का कोई मायने इसलिए नहीं है क्योंकि बस्तर में कानून का
Read More