दहशत की काली परछाई से निकल अब गीत-नृत्य से बंधने लगा है समा… मुर्दोण्डा में दुर्गोत्सव समिति का सांस्कृतिक आयोजन बना गवाह…
इम्पैक्ट डेस्क. बीजापुर. कुछ सालों पहले तक बीजापुर का आवापल्ली,मुर्दोण्डा, बासागुड़ा जैसे गांव सांझ ढलने के साथ कंटीले तारों की बाड़ और बंदूकों के साए में घिर जाया करता था, नक्सलवाद की काली परछाई में रातें सहमी हुआ करती थी, वक्त निकलता गया, हालात सुधरते गए , नतीजतन अब कंटीले तारो की बाड़ और दहशत की काली रात से निकलकर नाच-गाना, उत्सव और उल्लास का माहौल फिर से बनने लगा है।नवरात्रि का पर्व गुजरने के बाद आवापल्ली-बासागुड़ा मार्ग पर स्थित मुर्दोण्डा गांव में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।यह आयोजन
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