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मध्य प्रदेश के किसानों को होगा बंपर फायदा, सरकार को गेहूं पर बढ़ाना पड़ेगी MSP! क्या है वजह

शहडोल खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में जहां धान की खेती सबसे बड़े रकबे में की जाती है, तो वहीं रबी सीजन में गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में उगाया जाता है. दरअसल, साल भर गेहूं की खूब डिमांड रहती है. इन दिनों गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जो आम आदमी के पर्स पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. लेकिन किसानों के नजरिए से देखें तो ये उनके लिए आने वाले समय के लिए राहत की खबर है. करीब 2 महीने बाद नया गेहूं आ जाएगा. इससे किसानों को

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गेहूँ उपार्जन के लिये 31 मार्च तक होगा पंजीयन-खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। उन्होंने बताया है कि वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये घोषित किया गया है। यह गत वर्ष से 150 रूपये अधिक है। मंत्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि गेहूँ की विक्री के लिए समय-सीमा में पंजीयन जरूर करायें। अभी तक किसानों द्वारा गेहूँ के समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिये ऑनलाइन पंजीयन किया जा रहा है। अभी तक 28

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किसानों को समर्थन मूल्य पर खरीदे गये गेहूँ पर मिलेगा 125 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस

भोपाल राज्य सरकार किसानों की खुशहाली और समृद्धि के लिये निरंतर कार्य कर रही है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये प्रदेश के पंजीयन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 तक है। किसान ऐप के माध्यम से घर बैठे पंजीयन कर सकेंगे। पंजीयन के लिये ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्रों पर नि:शुल्क पंजीयन की व्यवस्था की गई है। गेहूँ उपार्जन के लिये समर्थन मूल्य 2425 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो गत वर्ष की

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मध्‍य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए पौने चार हजार केंद्र बनाए जाएंगे

भोपाल  प्रदेश सरकार हर बार की तरह इस बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन करेगी। इसके लिए किसानों का पंजीयन प्रारंभ कर दिया गया है।पिछले साल 100 लाख टन उपार्जन का लक्ष्य रखा गया था। इसके हिसाब से ही बोरे, सिलाई के लिए धागा और भुगतान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से साख सीमा स्वीकृत कराई गई थी। सरकार ने ऋण की गारंटी ली, पर खरीदी 48 लाख टन ही हुई थी। इससे सबक लेते हुए सरकार ने इस बार लक्ष्य 20 लाख टन घटा दिया है।

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मध्य प्रदेश के मालवा में किसान का रुझान एक बार फिर गेहूं की ओर बढ़ा, बंपर पैदावार की उम्मीद

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। Read moreमहाकाल मंदिर

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