पुलिस और नक्सल संघर्ष : ग्रामीणों का आरोप सुकमा जिले के अरलमपल्ली गांव में फोर्स ने घरों को नुकसान पहुंचाया…
इम्पेक्ट न्यूज. रायपुर।
छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित सुकमा जिले के अरलमपल्ली गांव में बीते गुरूवार को फोर्स द्वारा ग्रामीणों के घरों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। यह आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।

हांलाकि दोरनापाल से जगरगुंडा मार्ग पर अरलमपल्ली गांव में फोर्स द्वारा ग्रामीणों के घरों को नुकसान पहुंचाने का यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले भी करीब आधा दर्जन बार इस तरह के आरोप फोर्स पर लगते रहे हैं। इस इलाके में हर बड़ी नक्सली वारदात के बाद फोर्स के सर्चिंग आपरेशन के बाद इस तरह की बातें उठती रही हैं। ऐसे कई मामलों में अभी भी जांच चल रही है।
सीजी इम्पेक्ट को प्राप्त कुछ तस्वीरों और विडियो में ग्रामीण इस संबंध में गोंडी बोली में फोर्स पर घरों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। चूंकि इस विडियो और तस्वीर की मौके पर जाकर तस्दीक नहीं की जा सकती इसलिए सीजीइम्पेक्ट ग्रामीणों के दावा की पुष्टि नहीं कर रहा है। बहरहाल हम तक पहुंचाई गई विडियो और तस्वीरों को देखें…
इस मामले में कोया समाज के जिलाध्यक्ष बेको हूंगा ने जवानों पर अरलमपल्ली के दो ग्रामीण सोड़ी जोगा व कवासी जोगा के घर में तोड़फोड़ करने, अनाज फेंकने, कपड़े फाड़ने और घर का सामान क्षतिग्रस्त करने का गंभीर आरोप लगाया है। चर्चा के दौरान बेको हुंगा ने कहा कि गुरुवार रात फोर्स ने अरलमपल्ली गांव की घेराबंदी की।
शुक्रवार सुबह लगभग सात बजे जवानों ने नक्सलियों का सहयोग करने का आरोप लगाते हुए सोड़ी जोगा व कवासी जोगा के घर में जमकर तोड़तोड़ की। जवानों ने अरलमपल्ली गांव के कुछ लोगों की पिटाई भी की। 9 लोगों को पकड़कर अपने साथ ले गए। गांव के ही कवासी हिड़मा का ट्रैक्टर भी जवान ले आए। हिड़मा ने अपने अन्य साथी माड़वी लखमा के साथ मिलकर कुछ साल पहले यह ट्रैक्टर खरीदा था।
हुंगा ने कहा कि वे जानकारी मिलने के बाद शुक्रवार दोपहर अरलमपल्ली गए थे। पूरे मामले की जांच की मांग करने हुए उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीणों ने नक्सलियों की मदद या किसी तरह का सहयोग किया भी था तो इसके लिए उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी। जवानों द्वारा घर में तोड़फोड़ करना गलत है।
एसपी बोले- जवानों ने ऐसा कुछ नहीं किया
इधर एसपी शलभ सिन्हा ने जवानों पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि फोर्स की टुकड़ी अरलमपल्ली इलाके की ओर सर्चिंग व नक्सलियों की धरपकड़ के लिए गुरुवार शाम रवाना की गई थी। जिनकी धरपकड़ के लिए फोर्स गई थी वे लोग भाग निकले। फोर्स शुक्रवार सुबह लौट आई। एसपी ने कहा ग्रामीण किसके कहने पर जवानों पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं इसकी जांच की जाएगी। जवानों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अंदुरुनी इलाकों की सर्चिंग के दौरान ग्रामीणों के साथ किसी तरह के हरकत न करें।
अरलमपल्ली इलाके में नक्सलियों ने जवानों पर बड़े हमले की रची थी साजिश
अप्रैल के पहले पखवाड़े में कमांडर नागेश की अगुवाई में नक्सलियों ने अरलमपल्ली और पलामड़गू इलाके में सर्चिंग के दौरान फोर्स की टुकड़ी पर बड़े हमले साजिश रची थी। साजिश के तहत ही नक्सलियों ने 7 अप्रैल को पोलमपल्ली से कुछ किमी पहले मुख्य सड़क पर बने पुल को बारुदी सुरंग से विस्फोट कर उड़ा दिया था। नक्सलियों का पता था कि जवानों की टुकड़ी विस्फोट के बाद आसपास के इलाके में सर्चिंग के लिए रवाना की जाएगी। नक्सली अरलमपल्ली व पालामड़गू के जंगलों में बड़ा एम्बुश लगाकर फोर्स की टुकड़ी का इंतजार कर रहे थे। पुल को ब्लास्ट कर उड़ाने के बाद जवानों की टुकड़ी सर्चिंग पर निकली भी थी पर जवानों की संख्या कम होने के कारण वे अरलमपल्ली व पालामड़गू तक नहीं गए। नक्सली दो-तीन दिनों तक एम्बुश लगाकर जवानों का इंतजार करते रहे। ऐसी घटनाओं के बाद नक्सलियों के एंबुश के कई प्रमाण हैं जिसे देखते जवान सर्तकता बरतते हैं।