तानाशाही की टूट रही सीमाएँ: बसन्त ताटी

बीजापुर।। उत्तरप्रदेश के हाथरस में गैंगरेप के कारण अपनी बेटी को खो चुके दलित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा को ग्रेटर नोएडा में पुलिस के रोकने पर वे कार छोड़कर पैदल जाने लगे थे।इस पर पुलिस द्वारा उनके साथ धक्का-मुक्की की गयी,जिससे राहुल जी नीचे गिर पड़े।उन्होंने यह आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा उन पर लाठीचार्ज भी किया।क्या यही स्वस्थ लोकतंत्र है?यह तो सत्ताधारी पार्टी की तानाशाही है।जनता देख रही है कि बीजेपी सरकारें तानाशाही की भी सारी हदें तोड़ रही हैं।यह लोकतंत्र की सरेआम हत्या का प्रयास है।देश की जनता यह नंगा सच खुली आँखों से देख रही है और समय आने पर वह इसका माकूल जवाब भी देगी।यह कहना है,वरिष्ठ कांग्रेस नेता और बीजापुर ज़िला पंचायत के सदस्य बसंत ताटी का। ताटी ने केन्द्र और उत्तरप्रदेश की बीजेपी सरकारों पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि दलित लड़की के साथ हुए इस बर्बरतापूर्वक किये गये गैंगरेप के अपराधियों को आख़िर पंद्रह दिनों तक क्यों बचाया जा रहा था?क्यों इतने दिन तक इस घटना को देश से छुपाया गया?क्यों मीडिया, जागरूक नागरिकों और विपक्ष को पीड़ित परिवार से मिलने से जबर्दस्ती रोका जा रहा है?मीडिया में जो ख़बरें आ रही हैं,उसके अनुसार तो पीड़ित परिवार को इस मामले में मुँह बंद रखने के लिये धमकाया भी जा रहा है।क्या यह सब तानाशाही नहीं है?आख़िर कब तक देश इस दहशतगर्दी को भोगेगा? घटना अत्यंत दुखद और शर्मनाक है। इसकी जितनी निंदा की जाए ,कम है।

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