30 साल की युवती ने शुरू की वैराग्य की यात्रा, नम आंखों से माता-पिता ने किया विदा, बचपन से धार्मिक रुचि
नई दिल्ली हमारे समाज में बेटी का जन्म एक बड़ा उत्सव होता है। माता-पिता अपनी बेटी को बड़े प्यार से पालते हैं और उसकी शादी बड़े धूमधाम से करते हैं। लेकिन जब बेटी सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर वैराग्य धारण करने का निर्णय लेती है, तो परिवार में एक विशेष प्रकार का माहौल बन जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण फिरोजाबाद की नेहा जैन ने प्रस्तुत किया है, जिन्होंने जैन धर्म के अनुसार सांसारिक बंधनों को त्याग कर सन्यास ले लिया है। अब वह दीक्षा को अंतिम रूप देने के
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