आपातकाल: लोकतंत्र का काला अध्याय: हितानंद शर्मा
आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’ को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की जनता ने तब तानाशाही के विरुद्ध स्वकतंत्रता की एक और लड़ाई लड़ी थी। इस बार लड़ाई अपने ही दिग्भ्रूमित सत्तालोलुप नेताओं से थी, जिसमें देश एक बार फिर विजेता बनकर उभरा था। पिछले कुछ वर्षों से कुछ विपक्षी नेता अक्सर संविधान की प्रति हाथ में लेकर भाषण देते दिखाई देते रहे हैं। बात-बात में संविधान की दुहाई देने का क्रम चल रहा है। भारत
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