ना तुम हारे ना हम जीते… चुनौतियों के बीच गुजरा बघेल सरकार का एक वर्ष
दिवाकर मुक्तिबोध। किसी सरकार के सौ दिन , दो सौ दिन , तीन सौ पैंसठ दिन और इसी तरह बढ़ते-बढते पाँच वर्ष पूर्ण होने पर स्वाभाविकत: उसके कामकाज का आकलन किया जाता है। सौ दिन व दो सौ दिन तो ख़ैर महत्व रखते ही हैं पर हाँ एक वर्ष पूर्ण होने पर अंदाज हो जाता है कि ट्रेन पटरी पर ठीक से दौड़ रही है कि नहीं और उसकी गति क्या है। छत्तीसगढ की कांग्रेस सरकार को इसी दिसंबर में एक साल पूर्ण हो गए। इस अवधि में से एप्रिल-मई
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