आडवाणी बंटवारे के बाद भारत आए थे, कराची के जिस स्कूल से पढ़े वहा से निकले थे दो PM और दो राष्ट्रपति
नई दिल्ली देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष रहे लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न सम्मान दिया जाएगा। आडवाणी का 8 दशक लंबा सार्वजनिक जीवन बड़े उतार-चढ़ावों भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कभी शुचिता और मर्यादा से समझौता नहीं किया। 1927 में कराची में जन्मे लालकृष्ण आडवाणी बंटवारे के बाद भारत आए थे और फिर यहां सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। उनका जीवन भारत की सीमा के दोनों तरफ की कहानी को समेटे हुए है। यहां तक कि 2005 में जब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से मिले तो
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