राष्ट्रीय शोधार्थी समागम भारतीय दृष्टि से शोध एवं अनुसंधान की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा : उच्च शिक्षा मंत्री परमार
भोपाल कृतज्ञता का भाव, भारत की सभ्यता एवं विरासत है और भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति, नदियों एवं सूर्य सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण के लिए, कृतज्ञता भाव से समृद्ध परम्पराओं को स्थापित किया था। भारत का ज्ञान, ज्ञान परम्परा एवं मान्यता के रूप में भारतीय समाज में सर्वत्र विद्यमान है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर, भारतीय समाज में परंपराएं एवं मान्यताएं स्थापित हुई हैं। हर विधा-हर क्षेत्र में विद्यमान भारतीय ज्ञान को युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में नए सन्दर्भों में, पुनः शोध एवं अनुसंधान
Read More