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editorial

EditorialMudda

माफ कीजिएगा…

सुरेश महापात्र। आज सुबह से ही मैं मीडिया के संपर्क से बाहर रहा। यदि रहा भी तो अपने हिस्से के पन्ने पर… रात 12 बजे बाद जब टहलने निकला मीडिया के भीतर तो सबसे पहले Rashmi Drolia की पोस्ट पर नज़र पड़ी… पूरा समझ नहीं पाया… कि क्या हुआ? कहाँ और कैसे? पहले लगा कि किसी एक को आतंकवादी ने गोली मार दी है। फिर चिंता बढ़ी तो बेचैनी को शांत करने के लिए मेन स्ट्रीम मीडिया में निकल गया। दैनिक भास्कर के एप पर महज़ कुछ मिनट पहले अपडेट

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शांति वार्ता की पेशकश : बस्तर के नक्सली इतिहास में जब-जब दबाव बढ़ा तब-तब वार्ता की पहल हुई पर नतीजा सिफर रहा…

गणेश मिश्रा। प्रदेश ही नही बल्कि देश भर में शांति वार्ता को लेकर अब तक नक्सलियों की ओर से करीब 4 बार पर्चे के माध्यम से प्रस्ताव आ चुका है और उससे भी बड़ी बात की नक्सलियों के इन चारों प्रस्तावों का प्रदेश के गृहमंत्री व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा हर बार जवाब दे चुके हैं इस बार तो अंतिम प्रस्ताव पर गृहमंत्री ने यहां तक कह दिया कि नक्सली अपनी ओर से जब तक किसी को अपना प्रस्तावक बनाकर नही भेजते तब तक वार्ता कैसे सम्भव है? उन्होंने कहा

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नेताओं से गलबहिया दिखाती तस्वीरें और पुलिस का बयान…पत्रकार मुकेश के हत्यारे की ढाल दिखाई दे रही है…

सुरेश महापात्र। इन तस्वीरों को देखकर हम जो भी अंदाज़ा लगाएँगे वह सही ही होगा यह गलत है… पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या करवाने वाले के साथ सोशल मीडिया पर भाजपा-कांग्रेस आपस में खेल रही हैं। सच्चाई यही है कि सड़क निर्माण से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर करने की कीमत मुकेश चंद्राकर ने जान देकर चुकाई है। ठेकेदार जो इन दो तस्वीरों में दिखाई दे रहा है इनमें से एक में वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के साथ गुलदस्ता लेकर खड़ा है। दूसरी तस्वीर में हत्यारा ठेकेदार सुरेश चंद्राकर

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Nazriya

साय सरकार का एक साल : चुनावी वायदों के व्यतिरेक विकास की योजनाएं कागजों पर और नक्सल मोर्चे पर बेहतर

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूर्ण हो गया. पिछले वर्ष इसी दिन साय ने मुख्य मंत्री पद की शपथ ली थी. उनके नेतृत्व में भाजपा सरकार का यदि एक साल का ट्रेक रिकॉर्ड देखा जाए तो वह सामान्य से अधिक नहीं है. दरअसल जिन वायदों के साथ भाजपा ने 2023 के विधान सभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था और सत्ता हस्तगत की थी, उनमें से कुछ योजनाएं सरकार ने तुरंत प्रारंभ कर दी जिसमे किसानों से बढी हुई दरों

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रायपुर दक्षिण उपचुनाव : रिकॉर्ड के लिए नहीं प्रतिष्ठा के लिए लड़ाई…

दिवाकर मुक्तिबोध। रायपुर लोकसभा की बहुचर्चित विधान सभा सीट रायपुर दक्षिण के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित हो जाएंगे. यह सीट दोनों पार्टियों, कांग्रेस व भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति में नहीं है अलबत्ता प्रतिष्ठा की लड़ाई जरूर है. छत्तीसगढ में भारतीय जनता पार्टी मजबूत बहुमत के साथ सरकार में है इसलिए इस सीट को जीतने से उसकी राजनीतिक स्थिति पर विशेष फर्क नहीं पड़ेगा. विधान सभा में उसके विधायकों की संख्या में एक का इज़ाफा होगा लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण घटना  सांसद

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