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जो कभी माओवादी दस्ते का हिस्सा थी अब वह हैं देश सेवा के लिए महिला कमांडो…

पी रंजन दास। बीजापुर। सियारी के पत्तों से पत्तल और दोना, चूल्हा-चौकी के साथ बस्तर की फिजा में मांदर की थाप और बांसूरी की सुरीली आवाज को लौटाने, यहां शांति बहाली के लिए महिलाएं भी पुरूषों के साथ कदम से कदम मिलाकर नक्सलियों को उनके ही गढ़ में मुंहतोड़ जबाव दे रही हैं। बस्तर में इस समय नक्सलियों के खिलाफ छिड़ी निर्याणक जंग में महिला कमांडोज को भी युद्धग्रस्त इलाकों में उतारा गया है। इनमें समर्पित महिला माओवादी भी शामिल है जो कल तक लोकतंत्र की मुखालफत में हथियार लेकर

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माओवादी हमलों को लेकर सभी की बेसुधगी ही हादसों का असल सबब…

सुरेश महापात्र।  हर हादसे के बाद दुख का सैलाब और आरोपों की झड़ी के बीच भावी माओवादी हमलों को लेकर सभी की बेसुधगी ही हादसों का असल सबब है। आप मौतों के बाद मातम तो मना सकते हैं… कड़ी कार्रवाई और कड़ी निंदा जैसे शब्दों का प्रयोग तो कर सकते हैं पर ऐसे हमलों को स्थाई तौर पर रोकने का इंतजाम तभी कर सकते हैं जब सुरक्षा मानकों के पालन में कोताही कतई ना की जाए…! बीते 26 अप्रेल को माओवादियों के IED ब्लास्ट की जद में आने से अरनपुर

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नारायणपुर का ब्रेहबेड़ा गांव में खुला नया पुलिस कैंप… टकराव की स्थिति… गांववालों का आरोप सुरक्षा के नाम पर दमन कर रहे जवान…

इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के कोहकामेटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ब्रेहबेड़ा में 1 नवंबर को पुलिस कैंप के विरोध में जुटे ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू किया। 28 नवंबर को इन आदिवासियों को पुलिस ने आंदोलन स्थल से खदेड़ दिया। फिर दोबारा ये गांववाले एकजुट होकर 11 दिसंबर को ब्रेहबेड़ा गांव के जंगल में सड़क किनारे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। स्थानीय आदिवासियों का आरोप है कि 16 दिसम्बर की सुबह 7 बजे से पुलिस वालों ने कैंप लगाकर इलाके को घेर

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#NAXAL दक्षिण बस्तर में माओवादियों की किलेबन्दी, महाराष्ट्र-तेलंगाना में आधार हुआ कमजोर, माड़ के बाद बीजापुर-सुकमा सरहद से संगठन को केंद्रित करने की जुगत…

P.Ranjan Das.Ground Report… बीजापुर। तेलंगाना और महाराष्ट्र में संगठन पर बढ़े दबाव के बाद माओवादी दक्षिण बस्तर के बीजापुर-सुकमा के सरहदी इलाकों पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करने विवश है।  शहीद सप्ताह के दौरान बस्तर के सघन वन और आदिवासी बहुल वाले इस इलाके में माओवादियों द्वारा आयोजित बड़ी सभा और पक्के मंच को लेकर सुरक्षा से जुड़े जानकार यही कह रहे हैं। अब तक दंडकारण्य में अबुझमाड़ को माओवादियों की अघोषित राजधानी बताया जाता रहा है, लेकिन बीते एक दशक में बीजापुर-सुकमा के सरहदी इलाके में तेज हलचल

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Exclusive Story : ” कभी नक्सली कमांडर रहे मड़कम ने कहा : मुख्यमंत्री जी आपने सड़क , कैम्प और स्कूलों को सुधारकर बदल दी है नक्सल प्रभावित इलाके की तस्वीर “

” मेरे बच्चे पढ़ रहे इंग्लिश मीडियम स्कूल में और जी रहे अच्छी लाइफ स्टाइल “ मड़कम मुदराज ने मुख्यमंत्री को सुनाई आपबीती.. कहा आत्मग्लानि में किया सरेंडर…पहले एसपीओ बना और आज हूं इंस्पेक्टर मड़कम के हाथों में हथियार अब भी , लोगों की जान लेने नहीं बल्कि बचाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इंस्पेक्टर मड़कम को अपने पास बुलाकर कंधे पर हाथ रखा और बजवायी ताली रायपुर । मुख्यमंत्री जी आपने सड़क , कैम्प और स्कूलों को सुधारकर नक्सल प्रभावित इलाके की तस्वीर बदल दी है । अब

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