छत्तीसगढ़ विधानसभा में भूपेश बघेल ने उठाए जेल मौतों और ड्रग तस्करी पर सवाल, गृहमंत्री से मांगा स्पष्टीकरण

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इम्पेक्ट न्यूज़। रायपुर, 26 फरवरी 2026:

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन दौरान पाटन विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की जेलों में होने वाली अस्वाभाविक मौतों (कस्टोडियल डेथ्स) को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक की अवधि में हुई 66 मौतों की विस्तृत जानकारी मांगी, जिसमें मृतकों के नाम, जेलों का विवरण और विशेष रूप से पंकज साहू तथा जीवन ठाकुर के मामलों पर जोर दिया। साथ ही, राज्य में अपराधों की स्थिति और ड्रग तस्करी से जुड़े एक बहुचर्चित मामले ‘नव्या मलिक’ को लेकर भी गृहमंत्री विजय शर्मा को घेरा।

भूपेश बघेल ने सदन में कहा कि राज्य की जेलों में इस अवधि में 66 बंदियों की मौत हुई है, लेकिन सरकार ने मृतकों के नामों की सूची उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने मांग की कि ये मौतें किन-किन जेलों में हुईं और मृतकों के नाम क्या हैं? यदि सूची की प्रतिलिपि उपलब्ध है, तो इसे सदन में प्रस्तुत किया जाए। विशेष रूप से कवर्धा की कमर्दा जेल में पंकज साहू की मौत और कांकेर जेल में जीवन ठाकुर (जिन्हें बाद में रायपुर स्थानांतरित किया गया) के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने विस्तृत विवरण मांगा।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मौत निर्दिष्ट समयावधि से बाहर है, इसलिए सूची में शामिल नहीं है। हालांकि, जीवन ठाकुर का नाम सूची में है। उन्होंने बताया कि जीवन ठाकुर को 12 अक्टूबर 2025 को कांकेर जेल लाया गया था, जहां मधुमेह की समस्या के कारण उन्हें 13 से 17 अक्टूबर तक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांकेर में भर्ती किया गया। इसके बाद 26 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 तक फिर से अस्पताल में रखा गया। कोर्ट के आदेश पर उन्हें रायपुर जेल स्थानांतरित किया गया, जहां उनकी तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल और ग्वाहरा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उनकी मौत हो गई। जेल अधीक्षक ने घटना की सूचना डीएसपी को दी, जिसके बाद जांच समिति गठित कर कार्रवाई शुरू की गई।

भूपेश बघेल ने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि जीवन ठाकुर पर कृषि दस्तावेजों में फर्जी वन अधिकार पत्र बनाने का आरोप था, जिसमें आठ लोग गिरफ्तार हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में ठाकुर को चिकित्सकीय सुविधा, परिवार और विधायकों से मिलने का अवसर दिया गया, लेकिन परिजन, आदिवासी समाज और जनप्रतिनिधियों ने देखभाल में देरी की आशंका जताई है। बघेल ने सदन से निवेदन किया कि इस प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए विधानसभा की किसी समिति से विशेष जांच करवाई जाए, ताकि जिम्मेदारी स्पष्ट हो और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इसके अलावा, बघेल ने अपराधों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पिछले 12 महीनों में हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में वृद्धि हुई है या कमी? साथ ही, अंतरराज्यीय ड्रग तस्करों की सूची के बारे में जानकारी मांगी। गृहमंत्री ने जवाब दिया कि हत्या में 3% और लूट में 10% की कमी आई है। ड्रग मामलों में 282 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 705 आरोपी शामिल हैं—662 गिरफ्तार और 206 का चालान पेश किया जा चुका है। हालांकि, बघेल ने रायपुर के बहुचर्चित ‘नव्या मलिक’ मामले को सूची में शामिल न करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इस चूक के कारण और नव्या मलिक के अपराधों तथा विदेशी संबंधों का स्पष्टीकरण मांगा।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार एंड-टू-एंड कार्रवाई कर रही है और कानून व्यवस्था मजबूत है। लेकिन विपक्ष ने इसे प्रशासन की विफलता करार दिया। इसके बाद विधायक अनिला भेड़िया ने जीवन ठाकुर की मौत को लेकर सवाल उठाया। इसमें कई तकनीकी बिंदुओं का जिक्र भी किया। उन्होंने सदन में बताया कि जीवन ठाकुर के बाद जेल में रहते हुए उनके पुत्र की भी मौत हो गई। इस मामले में विपक्ष ने आक्रामक रूख अख्तिायार कर लिया।

सदन में उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने आदिवासी की मौत को गंभीर बताया। इसके बाद भूपेश बघेल ने एक बार फिर विधानसभा समिति से जांच की मांग रखी। जिस पर गृहमंत्री ने कहा कि मैं नहीं जानता कि मजिस्ट्रियल जांच के उपर कोई जांच हो सकती है। तो श्री बघेल ने कहा विधानसभा सभी से उपर है। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। नेता प्रतिपक्ष ने नारेबाजी के बीच कहा सभापति जी इतनी बड़ी समस्या है कि मंत्री का हर उत्तर संदिग्ध है। इसके साथ ही विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया।

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