छत्तीसगढ़: स्कूल लाइब्रेरी की 20 करोड़ की किताबें गोदाम में सड़ रही हैं, ट्रांसपोर्टेशन के नाम धन और ज्ञान का नुकसान!

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सुरेश महापात्र। रायपुर।

प्रदेश के शिक्षा विभाग में व्याप्त लापरवाही का एक और उदाहरण सामने आया है, जहां भनपुरी स्थित पाठ्यपुस्तक निगम के गोदाम में करीब 20 करोड़ रुपये की किताबें पिछले चार महीनों से धूल फांक रही हैं। ये किताबें स्कूलों में पहुंचाई जानी थीं, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था न होने के कारण गोदाम में ही पड़ी हुई हैं। ट्रांसपोर्टेशन के नाम धन और ज्ञान का नुकसान हुआ है!

सत्र समाप्त होने वाला है, किताबें 10वीं व 12वीं कक्षा के छात्रों तक नहीं पहुंचीं, तो इनका उपयोग नहीं हो पाया और ना ही लाभ मिल पाया। समग्र शिक्षा योजना के तहत जुलाई और अगस्त में किताबें खरीदने का आदेश जारी किए गए थे कि किताबें समय पर स्कूलों तक पहुंचाई जाएं। लेकिन पूर्व व्यवस्था को ध्वस्त कर नई व्यवस्था बनाने के प्रयास में ट्रांसपोर्टेशन का निर्धारण ही नहीं हो सका। पहले की व्यवस्था में प्रकाशक परिवहन का पैसा देते थे, जो जिलों में जाता था और उसी से किताबों का उठाव होता था।

यह व्यवस्था पिछले तीन वर्षों से चल रही थी, लेकिन इस बार ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था ही नहीं की गई। नतीजतन, किताबें गोदाम में ही रह गईं।

इस संबंध में पाठ्यपुस्तक निगम के जीएम डिगेश पटेल से चर्चा की कोशिश की गई पर वे उपलब्ध नहीं हो सके। सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते बताया कि दो बार पत्र लिखा गया है। इसके बावजूद पुस्तकों का उठाव नहीं हो पाया है। अब नए सत्र में स्कूली पुस्तकों की छपाई के लिए पेपर की डिलीवरी होने पर गोदाम में जगह की समस्या हो जाएगी। यह समस्या केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है।

जानकारी हो कि स्कूलों में लाइब्रेरी के लिए प्रतिवर्ष 40 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होता है, जिसमें से 50 प्रतिशत किताबें केंद्रीय संस्थाओं जैसे सीआईएल और एनबीटी से सीधे ऑर्डर की जाती हैं। शेष 20 करोड़ रुपये के लिए पब्लिशर्स से ईओआई (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) मंगवाया जाता है, जिसमें लोकल पब्लिशर्स और स्थानीय भाषा की किताबें भी शामिल होती हैं।

सूत्रों का कहना है कि करीब 300 पंजीकृत पब्लिशर्स इस प्रक्रिया में भाग लेते हैं। इस वर्ष जुलाई 2025 में खरीदी प्रक्रिया पूरी की गई, ऑर्डर अगस्त-सितंबर में जारी हुए, लेकिन किताबें अक्टूबर-नवंबर से गोदाम में पड़ी हुई हैं। लाइब्रेरी किताबों का वितरण विभिन्न स्कूलों के लिए तय मानकों के आधार पर होता है।

छत्तीसगढ़ में 30,494 प्राइमरी स्कूलों को 5 हजार रुपये के मान से, 13,082 मिडिल स्कूलों को 13 हजार रुपये के मान से, कुल 43,576 स्कूलों के लिए 32 करोड़ रुपये; 1,869 हाईस्कूलों को 15 हजार रुपये के मान से 2 करोड़ 80 लाख रुपये, और 2,728 हायर सेकंडरी स्कूलों को 20 हजार रुपये के मान से 5 करोड़ 45 लाख रुपये का आवंटन किया जाता है।

कुल मिलाकर 4,597 स्कूलों के लिए 8 करोड़ 25 लाख रुपये और इस प्रकार से योजना से  करीब 40 करोड़ रुपये की किताबें चार वर्षों से खरीदी जा रही हैं।चिंताजनक बात यह है कि बीते पांच वर्षों में लाइब्रेरी के नाम पर करीब दो सौ करोड़ रुपये की किताबें खरीदी गई हैं, लेकिन इस शैक्षणिक सत्र में ट्रांसपोर्टेशन और वितरण की लापरवाही से किताबों का उपयोग छात्र नहीं कर पाए

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सरकारी धन का दुरुपयोग है और छात्रों के शिक्षा अधिकार पर सीधा असर डाल रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जल्द ही ट्रांसपोर्टेशन टेंडर को दोबारा शुरू करने की योजना है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सत्र के अंत में छात्रों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

इस संबंध में समग्र शिक्षा में उप संचालक एवं लाइब्रेरी प्रभारी राजेश सिंह से इम्पेक्ट ने बात की। उन्होंने माना कि इस वर्ष भनपुरी पाठ्यपुस्तक निगम के गोडाउन में किताबें रखी हुईं हैं। जिसका वितरण नहीं हो पाया है। श्री सिंह ने बताया कि इन पुस्तकों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए केंद्रीय भंडार निगम के माध्यम से शासकीय दर पर ढुलाई के लिए चर्चा चल रही है। आगामी एक माह में यह प्रक्रिया पूरी होने की संभावना उन्होंने जताई।

श्री सिंह ने स्वीकार किया कि पाठ्य पुस्तक निगम के भंडार गृह महाप्रबंधक के माध्यम से दो बार पुस्तकों को हटाने के लिए पत्र आया है। चूंकि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए पुस्तकों की छपाई के लिए कागज आदि का भंडारण किया जाना है तो उनकी चिंताओं को देखते हुए इसे हटाने के लिए व्यवस्था करवाई जा रही है।

श्री सिंह ने बताया कि पहले जिलों को राशि दे दी जाती थी जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार पुस्तकों का ट्रांसपोर्ट करवा लेते थे इस बार टेंडर करके ट्रांसपोर्ट करने की प्रक्रिया को वित्त नियंत्रक की आपत्ति के चलते रोक दिया गया जिससे यह स्थिति निर्मित हुई है। इम्पेक्ट ने जब यह सवाल किया कि मौजूदा सत्र के कक्षा दसवीं औीर बारहवीं के छात्रों को तो इन किताबों का लाभ नहीं मिल सका? इस पर श्री सिंह ने कहा कि अब यह हो गया तो क्या किया जा सकता है!

अगले अंक में प्रदेश में स्कूल लाइब्रेरी की पड़ताल रिपोर्ट

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