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विष्णु सरकार ने दी ‘सिस्टम’ को सुदर्शन चक्र की चेतावनी…

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सुरेश महापात्र।

छत्तीसगढ़ में सरकार बनने के बाद पहली बार विष्णु देव साय ने कलेक्टोरेट कांफ्रेंस में शामिल हुए। उन्होंने सिस्टम को साफ संदेश दे दिया है कि यह विष्णु सरकार है सुदर्शन चक्र चलाने की नौबत ना आए। यह चेतावनी सिस्टम को दे दी गई है। एक प्रकार से यह बहुप्रतिक्षित रहा कि लोगों को इस बात का एहसास हो कि सरकार का मुखिया जिले के मुखिया यानि सिस्टम के डीएम को जनता के प्रति जवाबदेही स्पष्ट करे।

लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि प्रदेश में सरकार की भूमिका को लेकर विपक्ष ने हमले तेज कर दिए थे। जमीन पर प्रशासन की कमजोरियां मीडिया के मार्फत सामने आने लगी थीं। कई ऐसी घटनाएं हुईं जिससे विष्णु सरकार के सुशासन पर सवाल उठने की नौबत आई। सत्ता और संगठन से जुड़े नेता, कार्यकर्ताओं का मनोबल भी डगमगाने लगा था।

ऐसे समय में अपेक्षाकृत शांत और सरल दिखने वाले मुख्यमंत्री से तल्ख टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा रही थी। गुरूवार को कलेक्टर कांफ्रेंस में सीएम विष्णुदेव साय ने कलेक्टरों की जवाबदेही तय कर दी। यहां तक कह दिया कि जिले की समस्या का निराकरण जिला स्तर में ही समय सीमा के भीतर हो जाए। लोगों को इसके लिए राजधानी तक पहुंचने की नौबत ना आए।

सीएम ने साफ—साफ कह दिया कि ‘आप कार्रवाई नहीं करेंगे तो मैं करूंगा!’ इसके निहितार्थ साफ हैं अब जमीन पर मुख्यमंत्री सीधे जनता के हित को लेकर सजग हैं और सिस्टम को सतर्क कर रहे हैं कि जनता के मुद्दों को प्रमुखता के साथ समाधान करना जिला कलेक्टर का दायित्व है। यह साफ है कि ‘आप कार्यवाही नहीं करेंगे तो मैं कार्रवाई करूंगा!’ इसमें स्पष्ट है सिस्टम की प्रोसिडिंग की जवाबदेही है ऐसा नहीं हुआ तो पनिशमेंट का प्रोसेस सीएम स्वयं तय करेंगे।

हाल ​के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जिससे सरकार की संवेदनशील छवि पर सीधा प्रभाव पड़ा मसलन डीईओ द्वारा छात्राओं को धमकाया जाना। इस मामले में सीएम ने सीधी कार्रवाई कर यह जता दिया था कि ऐसी किसी भी गतिविधि पर वे कार्रवाई करेंगे। इसके बाद तहसीलदार का मामला आया।

शाला भवन निर्माण में गुणवत्ता को लेकर तमाम शिकायतों का पिटारा खुला पड़ा है। पूववर्ती सरकार के दौर में किए गए कई शालाओं के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल हैं। ऐसे में यह संदेश देना अनिवार्य था कि जब सरकार शिक्षा की प्राथमिकता को लेकर कटिबद्ध है ऐसे में शिक्षा मंदिरों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता अक्षम्य अपराध है। स्वास्थ्य के मामले में भी सरकार के मुखिया के तौर पर सीएम ने जिला कलेक्टरों की जवाबदेही तय कर दी है।

राज्य में राजस्व विभाग के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोगों में किसान ही होते हैं। राजस्व विभाग की समीक्षा में जिस तरह से स्पष्ट गाइड लाइन मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को ​दी है उसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा। पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम के चैनल में छोटी—छोटी त्रूटियों के चलते चक्कर काटते लोगों को इससे सीधे राहत मिलेगी।

आज कांफ्रेंस के दूसरे दिन कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षकों से मुख्यमंत्री संवाद करेंगे। सभी की नजरे प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा पर रहेगी। हाल के दिनों में तमाम तरह के अपराध से राजधानी समेत प्रदेश के अनेक हिस्सों में कई घटनाएं सामने आईं हैं। हांलाकि करप्शन के मामले में मौजूदा सरकार में एंटी करप्शन ब्यूरो जिस तरह से कार्रवाई कर रही है उससे सिस्टम को सुधारने के लिए प्रयास का संदेश भी जा रहा है।