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इम्पेक्ट न्यूज। डेस्क।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई (86) की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त बड़े पैमाने पर हवाई हमलों में होने की खबर ने मध्य पूर्व की राजनीति को झकझोर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान स्थित उनके आधिकारिक परिसर को निशाना बनाए जाने के दौरान वे मारे गए। इसके बाद ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई।
बताया जा रहा है कि यह सैन्य अभियान इज़रायल के “रोअरिंग लायन” और अमेरिका के “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत समन्वित रूप से चलाया गया। हमले 28 फरवरी की सुबह शुरू हुए, जिनमें सैकड़ों लड़ाकू विमानों, टॉमहॉक मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग किया गया। तेहरान, इस्फहान और क़ोम सहित 24 प्रांतों में सैन्य, परमाणु और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार इस कार्रवाई में आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर, पूर्व वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली शमखानी और कई अन्य उच्चाधिकारी भी मारे गए। ईरानी मीडिया ने कुल मृतकों की संख्या 200 से अधिक बताई है।
हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इज़रायल के तेल अवीव और हाइफा सहित कई शहरों तथा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका पैदा हो गई। ईरान ने इसे “निर्णायक और सबसे विनाशकारी प्रतिक्रिया” की शुरुआत बताते हुए आगे भी जवाब जारी रखने की चेतावनी दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को ईरानी शासन के खिलाफ निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि इससे “ईरानी जनता को अपनी सरकार वापस लेने का अवसर मिलेगा।” इज़रायल ने इसे “आतंकवादी शासन को समाप्त करने का अवसर” करार दिया। दूसरी ओर, ईरान के भीतर कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन की मांग भी सामने आई है। निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी ने लोकतांत्रिक संक्रमण की अपील की है।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत अंतरिम व्यवस्था के रूप में राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल की भागीदारी से नेतृत्व संचालित किया जा रहा है, जबकि अंतिम निर्णय एक्सपर्ट्स असेंबली द्वारा नए सर्वोच्च नेता के चयन के माध्यम से लिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया तीव्र रही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है। चीन और रूस ने हमलों की निंदा की, जबकि भारत, पाकिस्तान और ओमान सहित कई देशों ने संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। तेल बाजारों में उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रतिशोध और सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा संतुलन पर भी गहरा असर पड़ सकता है। वर्तमान स्थिति तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हुई हैं।
प्रतिक्रियाएं
विश्व के प्रमुख नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर मिश्रित लेकिन ज्यादातर सतर्क प्रतिक्रियाएं दी हैं। अधिकांश नेताओं ने संयम बरतने, तनाव कम करने और बातचीत की अपील की है, जबकि कुछ ने हमलों का समर्थन किया और कुछ ने कड़ी निंदा की।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत को “इतिहास के सबसे दुष्ट लोगों में से एक की मौत” करार दिया और इसे ईरानी लोगों के लिए अपनी सरकार वापस लेने का “सबसे बड़ा मौका” बताया। उन्होंने हमलों को जारी रखने की चेतावनी दी और कहा कि अगर ईरान ने जवाबी हमला किया तो “कभी न देखी गई ताकत” से जवाब दिया जाएगा।
- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों को “आतंकवादी शासन को समाप्त करने का अवसर” बताया और ईरानी लोगों से शासन के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की।
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने हमलों को “शांति के लिए खतरा” करार दिया और सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में सभी पक्षों से तुरंत युद्धविराम और बातचीत की मांग की।
- रूस ने हमलों की कड़ी निंदा की और इसे “संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ पूर्वनियोजित और उकसावे रहित सशस्त्र आक्रमण” बताया। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजरायल परमाणु चिंताओं के बहाने शासन परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं।
- चीन ने हमलों पर “गहरी चिंता” जताई और तत्काल युद्धविराम की मांग की। चीन ने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए तथा बातचीत फिर से शुरू की जानी चाहिए।
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संयुक्त बयान में हमलों में भाग न लेने की बात कही, लेकिन अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय भागीदारों से संपर्क में रहने की पुष्टि की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और बातचीत से समाधान की अपील की।
- कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिकी कार्रवाई का खुला समर्थन किया।भारत ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर “गहरी चिंता” जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
- ओमान के विदेश मंत्री ने अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच हमलों को “गंभीर चिंता” का विषय बताया और कहा कि सक्रिय वार्ता को फिर से कमजोर किया गया है।
कुल मिलाकर, पश्चिमी सहयोगी देशों में विभाजन दिखा है—कुछ ने समर्थन किया, जबकि यूरोपीय नेता और रूस-चीन जैसे देशों ने निंदा की और क्षेत्रीय युद्ध फैलने के खतरे पर चिंता जताई। स्थिति अभी भी अस्थिर है और वैश्विक स्तर पर युद्धविराम की मांग तेज हो रही है।
