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between naxal and force

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#between naxal and force एस्सार का पाइप लाइन और माओवादियों का दबाव…

सुरेश महापात्र। हर ऐसे व्यक्ति को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है जिसने भी दोनों पक्षों के बीच निष्पक्ष होने की नाकाम कोशिश की है। या तो उसे माओवादियों ने मार दिया या फोर्स ने… बच गए तो धाराओं से लैस पुलिस तो है ही… (1) से आगे … दक्षिण बस्तर के सारे इलाकों में फोर्स का दबाव बढ़ा दिया गया। ग्रामीण इलाकों के मैदानी कर्मचारियों पर भी गहरी निगरानी रखने की शुरूआत कर दी गई। विशेषकर उन जगहों पर शक बढ़ता गया जहां बिना माओवादियों की सहमति के कोई चैन

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#between naxal and force सोनी सोरी के दस बरस छह महिने और 4 दिन तक से पहले बस्तर… जहां माओवादी, पुलिस और जनता निष्पक्ष नहीं हो सकती…

सुरेश महापात्र। बस्तर में माओवादियों की समस्या के समाधान के नाम पर कितना कुछ हो रहा है। पृथक छत्तीसगढ़ से पहले पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश सरकार पर यह आरोप लगता रहा कि बस्तर के पिछड़ेपन के लिए राज्य सरकार ही जिम्मेदार है। बस्तर अंतिम छोर पर रहा। विकास के पैसा और पहिया रायपुर से ही गुम हो जाता रहा। यही वजह है बस्तर में विकास ही अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। विकास में बाधा के लिए माओवादियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। छत्तीसगढ राज्य निर्माण के

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एस्सार—नक्सल सांठगांठ के मामले में #NIA अदालत ने जीएम वर्मा और सोनी सोरी समेत सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त किया… पुलिस द्वारा जप्त दिखाए गई रकम ठेकेदार बीके लाला को वापस करने का आदेश…

इम्पेक्ट न्यूज। दंतेवाड़ा। सितंबर 2011 में एस्सार और माओवादियों के बीच पैसे के लेन—देन को लेकर कुआकोंडा पुलिस की कार्रवाई के मामले में दस बरस बाद एनआईए के विशेष अदालत का फैसला आ गया है। इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए ठेकेदार बीके लाला, एस्सार महाप्रबंधक डीवीसीएस वर्मा, पालनार आश्रम अधीक्षिका श्रीमती सोनी सोरी और उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को दोष मुक्त घोषित किया है। एनआईए की विशेष अदालत का यह फैसला सोमवार 14 मार्च को आया है। विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार देवांगन, एनआईए एक्ट/अनुसूचित अपराध ने अपना

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