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ग्रामीणों ने ग्रामसभा से लौटाया एसडीएम को… आत्म समर्पितों की कॉलोनी निर्माण का विरोध तेज… विरोध में झोड़िया बाड़म में हुई ग्राम सभा

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इम्पेक्ट न्यूज़। दंतेवाड़ा।

माओवादी हिंसा पीड़ितों व आत्मसमर्पित माओवादियों के परिवारों के लिए गीदम ब्लॉक के झोड़िया बाड़म में प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। इस सिलसिले में ग्रामीणों ने सोमवार को ग्राम पंचायत झोड़िया बाड़म में ग्राम सभा बुलाई थी।

ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन की ओर से गीदम एसडीएम विवेक चंद्रा भी दल-बल समेत पहुंचे और ग्रामीणों को समझाईश देने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण किसी भी स्थिति में यहां आवासीय परिसर बनने नहीं देने की बात पर अड़े रहे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने ग्रामीणों की सहमति के बगैर, बिना ग्राम सभा अनुमोदन के ही आवासीय कॉलोनी निर्माण का भूमिपूजन कर दिया। इसका वे पुरजोर विरोध करते हैं। समझाईश के बाद भी ग्रामीणों का विरोध जारी रहने पर एसडीएम व तहसीलदार मौके से लौट गए।

क्या है मामला?
माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासन पुनर्वास नीति चला रहा है। जिसके तहत माओवाद छोड़कर सरेंडर करने पर उन्हें अन्य सुविधाओं के साथ आवास भी दिलवाया जाता है।

इसी क्रम में झोड़िया बाड़म में ऐसे 38 आवास बनाकर मॉडल के तौर पर विकसित करने की तैयारी है।

2 माह पहले 26 मई को विधायक चैतराम अटामी, कलेक्टर कुणाल दुदावत, एसपी गौरव राय ने इन निर्माण कार्यों का भूमिपूजन झोड़िया बाड़म गांव में चयनित 11 हेक्टेयर भूमि पर किया था, जिसमें बनने वाले इन 38 पक्के मकानों को एक मॉडल क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है।

इन मकानों के साथ-साथ आजीविका के साधनों के लिए मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन एवं सब्जी उत्पादन हेतु अलग से भूमि प्रदान की जाएगी।

ये सुविधाएं भी मिलेंगी
तहत जिस दिन कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण करता है, उसी दिन से उसे शासन की समस्त योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें राशन कार्ड, आधार कार्ड, मनरेगा कार्ड, बस पास, श्रम कार्ड पंजीयन, कौशल विकास, आयुष्मान कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं।