Friday, January 23, 2026
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…और यूं कल—कल करती इंद्रावती बहने लगी बस्तर की राह… 15 गांवों के इंद्रावती बचाओ मंच के ग्रामीणों ने राह की बाधा रेत के टीले को हटाया…

इम्पेक्ट न्यूज। जगदलपुर। आज सुबह बस्तर और ओड़िसा की सीमा पर इंद्रावती नदी के उस मुहाने पर इंद्रावती माई की जय के जयकारे के साथ ग्रामीणों ने प्राणदायिनी नदी को बस्तर में नवजीवन प्रदान कर दिया। दरअसल ओड़िसा के आते हुए इंद्रावती का बहाव जोरानाले से होकर सबरी की ओर मुड़ गया है। बारिश के बाद इंद्रावती नदी पर बहाव यकायक ठहर जाता है जिसका प्रभाव बस्तर में इंद्रावती की तटीय क्षेत्र में किसानी करने वालों पर पड़ता रहा है। Read moreCJI के खिलाफ जांच से हटे जस्टिस रमन, महिला

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CG breakingD-Bastar Division

बस्तर के विकास का नया अध्याय लिखेगी बोध घाट सिंचाई परियोजना

रायपुर। बोधघाट एक ऐसा प्रोजेक्ट जिसका लाभ सिर्फ और सिर्फ बस्तरवासियों को : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोधघाट बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना बस्तर के विकास का नया अध्याय लिखेगी। इंद्रावती नदी के जल का बस्तरवासियों के हक में सदुपयोग के लिए बोधघाट सिंचाई परियोजना का निर्माण जरूरी है। Read moreइंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने फतह किया कामयाबी का नया शिखर, देश के सर्वश्रेष्ठ 10 कृषि विश्वविद्यालयों शामिलमुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह मानना है कि बस्तर के विकास के इतिहास में बोधघाट प्रोजेक्ट अब तक का एक मात्र ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसका शत-प्रतिशत

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District Beejapur

तीन राज्यों की सरहद पर आस्था और इतिहास की संगम स्थली भद्रकाली सैलानियों की नजरों से ओझल,
जीवनदायिनी इन्द्रवती पहुँचकर गोदावरी में होती है समाहित, छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगान, महाराष्ट की सीमाएं भी करती है स्पर्श,
पर्यटन की असीम संभावनाओं के बाद भी उपेक्षित है यह स्थल.

बीजापुर। बस्तर में काकतीय राजवंश की स्थापना के प्राचीनतम इतिहास पर गौर करें तो बीजापुर के भद्राकाली गांव का जिक्र सबसे पहले होता है। वो इसलिए कि वर्तमान तेलंगाना के वारंगल से काकतीय राजा अन्नमदेव भद्राकाली के इंद्रावती और गोदावरी दो नदियों के संगम स्थल से ही बस्तर में दाखिल हुए थे और भोपालपट्नम पर अपनी पहली जीत दर्ज कर बस्तर में काकतीय राजवंश की नींव रखी थी। मां भद्रकाली के मंदिर के लिए चर्चित बीजापुर का भद्रकाली गांव के समीप ही बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती और दक्षिण की तरफ

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