Friday, January 23, 2026
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संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम जहां इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है

रायपुर, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में

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District Beejapur

तीन राज्यों की सरहद पर आस्था और इतिहास की संगम स्थली भद्रकाली सैलानियों की नजरों से ओझल,
जीवनदायिनी इन्द्रवती पहुँचकर गोदावरी में होती है समाहित, छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगान, महाराष्ट की सीमाएं भी करती है स्पर्श,
पर्यटन की असीम संभावनाओं के बाद भी उपेक्षित है यह स्थल.

बीजापुर। बस्तर में काकतीय राजवंश की स्थापना के प्राचीनतम इतिहास पर गौर करें तो बीजापुर के भद्राकाली गांव का जिक्र सबसे पहले होता है। वो इसलिए कि वर्तमान तेलंगाना के वारंगल से काकतीय राजा अन्नमदेव भद्राकाली के इंद्रावती और गोदावरी दो नदियों के संगम स्थल से ही बस्तर में दाखिल हुए थे और भोपालपट्नम पर अपनी पहली जीत दर्ज कर बस्तर में काकतीय राजवंश की नींव रखी थी। मां भद्रकाली के मंदिर के लिए चर्चित बीजापुर का भद्रकाली गांव के समीप ही बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती और दक्षिण की तरफ

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