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विष्णु के सुशासन का दो वर्षीय सफर – विकास, शांति और पारदर्शिता की नई इबारत…

सुरेश महापात्र। छत्तीसगढ़ के लिए दिसंबर का महीना हमेशा खास रहा है। 1 नवंबर 2000 को राज्य के गठन के साथ ही यह महीना नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। लेकिन 2023 के दिसंबर में एक और ऐतिहासिक मोड़ आया, जब भाजपा ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की और विष्णुदेव साय चौथे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कीं। आदिवासी समाज से आने वाले साय ने अपने दो वर्षीय कार्यकाल में न केवल राज्य को नक्सलवाद की जकड़न से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए, बल्कि

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बस्तर में नक्सलवाद का सबसे बड़ा चेहरा हिड़मा मारा गया…  शाबासी उन सभी को…  श्रद्धांजलि उन जवानों को  जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौच्छावर कर दिया

त्वरित टिप्पणी। सुरेश महापात्र।  शाबासी उन जवानों के हिस्से जो बीते कई दशकों से बस्तर को आतंक मुक्त बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा रहे। श्रद्धांजलि उन जवानों को जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौच्छावर कर दिया। शाबासी उस सरकार को जिन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया। शाबासी उन सभी पत्रकारों को जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर बस्तर की हिंसक तस्वीरों को हर तरह से उकेरा… कभी शब्दों से, कभी चित्र से, कभी विडियो से और अपनी जुबान से जिसमें सच बोलने के लिए सबसे ज्यादा ताकत लगती है। आज सुबह जैसे ही

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छत्तीसगढ़ में भाजपा की सेकेंड लाइन पॉलिटिक्स और डा. रमन सिंह का भविष्य

सुरेश महापात्र। छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक रणनीति को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। यह विस्तार न केवल क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन को मजबूत करने की कवायद है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि पार्टी अब अपनी दूसरी पंक्ति के नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। इस प्रक्रिया में नए चेहरों को मौका दिया गया है, लेकिन पुराने दिग्गजों को मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से कई सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर, अब

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सरकार की योजनाओं का नतीजा अब समर्पण करने सामने आ रहे नक्सली लीडर…

बस्तर में चल रही है छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई… विशेष संपादकीय। सुरेश महापात्र। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में गुरुवार को 61 माओवादियों द्वारा एक साथ आत्मसमर्पण करना न केवल राज्य सरकार की नीतियों की जीत है, बल्कि माओवादी उग्रवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम भी है। करीब सवा दो करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि विष्णुदेव साय सरकार की रणनीति और विकासपरक योजनाएं, विशेष रूप से “नियद नेल्लानार” (आपका अच्छा गांव) योजना, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ शांति स्थापित

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तो यह तय मान लेना चाहिए कि नक्सल मुक्त बस्तर की डेडलाइन 31 मार्च 2026 ही है…

सुरेश महापात्र। नक्सल मोर्चे पर अविश्वसनीय सफलता के बाद माओवादियों का गढ़ ढहता दिखाई दे रहा है। बस्तर में बड़ी तेजी के साथ परिस्थितियाँ बदलती दिखाई देने लगी। इसके पीछे का रहस्य एक ऐसी कहानी है जो न केवल रणनीतिक कौशल और नेतृत्व की दृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक बदलाव और स्थानीय समुदायों के विश्वास को जीतने की शक्ति को भी उजागर करती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद का खात्मा लंबे समय से एक असंभव सपना माना जाता था। यह क्षेत्र माओवादियों का गढ़ रहा है, जहां

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नहीं लगता शांति वार्ता की जरूरत है… बशर्ते?

विशेष टिप्पणी। सुरेश महापात्र। बस्तर में माओवादियों के साथ संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। इसमें ना जाने कितने लोगों की मौत दर्ज है। किसे शहीद कहें और किसे मौत? यह भी बड़ा सवाल रहा है। चार दशक पुराने इस माओवादी इतिहास में बस्तर एक अघोषित युद्ध क्षेत्र की तरह ही रहा है। अब पहली बार ऐसा साफ दिखाई दे रहा है कि बस्तर में लंबे समय तक बैकफुट पर रहे सशस्त्र बलों का आत्मबल कामयाबी से बढ़ा है। हर उस इलाके में सशस्त्र बलों का अब दबदबा साफ दिखाई

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Nazriya

भ्रष्टाचार के मामले और अदालतों की क्लीन चिट… क्या आरोप महज राजनीति का हिस्सा थे?

विशेष टिप्पणी। सुरेश महापात्र। यूपीए यानी यूनाईटेड प्राग्रेसिव अलायंस की सरकार पहली बार 2004 में चुनकर आई। इसके बाद एक सबसे बड़ी बहस ने जन्म लिया कि क्या यूपीए के प्रमुख होने के कारण कांग्रेस के सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी अब प्रधानमंत्री बन सकतीं हैं। सवाल आसान था और जवाब उतना ही कठिन क्योंकि तब प्रमुख विपक्षी दल की ओर से सुषमा स्वराज, उमा भारती ने यह तक ऐलान कर दिया कि यदि सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनती हैं तो वे अपना सिर मुंडवा लेंगीं। पूरे देश में गहमा—गहमी

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EditorialMudda

माफ कीजिएगा…

सुरेश महापात्र। आज सुबह से ही मैं मीडिया के संपर्क से बाहर रहा। यदि रहा भी तो अपने हिस्से के पन्ने पर… रात 12 बजे बाद जब टहलने निकला मीडिया के भीतर तो सबसे पहले Rashmi Drolia की पोस्ट पर नज़र पड़ी… पूरा समझ नहीं पाया… कि क्या हुआ? कहाँ और कैसे? पहले लगा कि किसी एक को आतंकवादी ने गोली मार दी है। फिर चिंता बढ़ी तो बेचैनी को शांत करने के लिए मेन स्ट्रीम मीडिया में निकल गया। Read moreदो बड़े घटनाक्रम और उनका जिक्र जरूरी तो है…दैनिक

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शांति वार्ता की पेशकश : बस्तर के नक्सली इतिहास में जब-जब दबाव बढ़ा तब-तब वार्ता की पहल हुई पर नतीजा सिफर रहा…

गणेश मिश्रा। प्रदेश ही नही बल्कि देश भर में शांति वार्ता को लेकर अब तक नक्सलियों की ओर से करीब 4 बार पर्चे के माध्यम से प्रस्ताव आ चुका है और उससे भी बड़ी बात की नक्सलियों के इन चारों प्रस्तावों का प्रदेश के गृहमंत्री व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा हर बार जवाब दे चुके हैं इस बार तो अंतिम प्रस्ताव पर गृहमंत्री ने यहां तक कह दिया कि नक्सली अपनी ओर से जब तक किसी को अपना प्रस्तावक बनाकर नही भेजते तब तक वार्ता कैसे सम्भव है? उन्होंने कहा

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District BeejapurNazriya

नेताओं से गलबहिया दिखाती तस्वीरें और पुलिस का बयान…पत्रकार मुकेश के हत्यारे की ढाल दिखाई दे रही है…

सुरेश महापात्र। इन तस्वीरों को देखकर हम जो भी अंदाज़ा लगाएँगे वह सही ही होगा यह गलत है… पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या करवाने वाले के साथ सोशल मीडिया पर भाजपा-कांग्रेस आपस में खेल रही हैं। सच्चाई यही है कि सड़क निर्माण से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर करने की कीमत मुकेश चंद्राकर ने जान देकर चुकाई है। Read moreयहां सरकार नहीं नक्सली देते हैं परमिशन, साधारण सी बैरिकेंटिंग में सभी के लिए संदेश “प्रवेश निषेध”! नक्सलगढ़ रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे पत्रकार को खाली हाथ लौटना पड़ा…ठेकेदार जो इन दो तस्वीरों

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Nazriya

साय सरकार का एक साल : चुनावी वायदों के व्यतिरेक विकास की योजनाएं कागजों पर और नक्सल मोर्चे पर बेहतर

दिवाकर मुक्तिबोध। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूर्ण हो गया. पिछले वर्ष इसी दिन साय ने मुख्य मंत्री पद की शपथ ली थी. उनके नेतृत्व में भाजपा सरकार का यदि एक साल का ट्रेक रिकॉर्ड देखा जाए तो वह सामान्य से अधिक नहीं है. दरअसल जिन वायदों के साथ भाजपा ने 2023 के विधान सभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था और सत्ता हस्तगत की थी, उनमें से कुछ योजनाएं सरकार ने तुरंत प्रारंभ कर दी जिसमे किसानों से बढी हुई दरों

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रायपुर दक्षिण उपचुनाव : रिकॉर्ड के लिए नहीं प्रतिष्ठा के लिए लड़ाई…

दिवाकर मुक्तिबोध। रायपुर लोकसभा की बहुचर्चित विधान सभा सीट रायपुर दक्षिण के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित हो जाएंगे. यह सीट दोनों पार्टियों, कांग्रेस व भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति में नहीं है अलबत्ता प्रतिष्ठा की लड़ाई जरूर है. छत्तीसगढ में भारतीय जनता पार्टी मजबूत बहुमत के साथ सरकार में है इसलिए इस सीट को जीतने से उसकी राजनीतिक स्थिति पर विशेष फर्क नहीं पड़ेगा. विधान सभा में उसके विधायकों की संख्या में एक का इज़ाफा होगा लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण घटना  सांसद

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छत्तीसगढ़ उपचुनाव रायपुर दक्षिण : मुकाबला कांटे का…

दिवाकर मुक्तिबोध। रायपुर दक्षिण विधान सभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत संभावना पर शायद ही कोई यकीन करें लेकिन चमत्कार कही भी, कभी भी हो सकते हैं और राजनीति भी इससे परे नहीं है. कांग्रेस ने नये व युवा चेहरे के रूप में आकाश शर्मा को टिकिट देकर जो दावं खेला है यदि वह कारगर रहा तो रायपुर दक्षिण का परिणाम एक ऐसे कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो जाएगा जिसकी प्रतीक्षा कांग्रेस डेढ दशक से कर रही है. लेकिन क्या ऐसा होगा ? सोचना कठिन है. खासकर इसलिए क्योंकि

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नक्सलियों के सामने तन गए आदिवासी…

सुदीप ठाकुर। अबूझमाड़ के जंगलों में नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों की सीमा पर चार अक्टूबर को हुई भीषण मुठभेड़ के बाद पुलिस ने 31 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया। इसके कुछ दिनों बाद माओवादियों के प्रवक्ता ने कहा कि मुठभेड़ में 35 माओवादी मारे गए। बीते चार दशक में बस्तर में यह माओवादियों के खिलाफ सबसे बड़ी मुठभेड़ है। करीब 14 साल पहले 6 अप्रैल, 2010 को नक्सलियों के अब तक के सबसे बड़े हमले में सुरक्षाबलों के 76 जवान मारे गए थे। ये दो घटनाएं एक दूसरे

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ट्विटर से समझें सोशल मीडिया प्लेटफार्म की हकीकत… मस्क की नई पालिसी ने सब कुछ खोल दिया है…

विशेष टिप्पणी / सुरेश महापात्र। बीते करीब दो—तीन महीनों से सोशल मीडिया के सबसे महंगे प्लेटफार्म​ ट्विटर को लेकर दुनिया भर में चर्चा है। कोई भी ऐसी मीडिया नहीं है जहां इसकी चर्चा ना हो रही हो। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदने के बाद उसका आधिपत्य भी हासिल कर लिया है। एलन मस्क ना केवल दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं बल्कि उनके अपने ट्विट्स पर मिलने वाले हिट्स इस बात को साबित करते हैं कि उनकी पहुंच कहां तक

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