कुदाली लिए सरस्वती कर रही थी मजदूरी… सांसद ने दिखाई स्कूल की राह-अब हाथों में होगी किताबें…
- –गरीबी की वजह से 2 साल पहले छोड़ चुकी थी स्कूल
- – मनरेगा कार्य के निरीक्षण के लिए सांसद पहुंचे थे, माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा के मटेनार
अनिमेष पॉल. जगदलपुर।
बस्तर के धूल माओवाद प्रभावित प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के मटेनार गांव में मजदूरी कर अपना परिवार चलाने वाली सरस्वती को अब कुदाली फावड़ा लेकर काम नहीं करना पड़ेगा। 2 साल पहले स्कूल छोड़ चुकी सरस्वती यादव अब दोबारा अपनी पढ़ाई आगे जारी रख सकेगी।

गरीबी की वजह से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हुई सरस्वती मंगलवार को मटेनार में मनरेगा योजना में फावड़ा कुदाली लिए डबरी खुदाई का काम कर रही थी। बस्तर सांसद दीपक बैज यहां लॉकडाउन 4 के दूसरे दिन कार्य के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।
कम उम्र की बच्ची को काम करते देख उन्होंने इसकी वजह जाननी चाही। सरस्वती ने बताया कि वह पास के स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। 2 साल पहले गरीबी की वजह से मजबूर पिता ने उसे स्कूल से निकाल कर कॉपी किताब की जगह हाथों में फावड़ा और कुदाली थमा दिया। तब से वह यह काम कर रही है।
सांसद बैज को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने मौके पर मौजूद जिला पंचायत सीईओ व एसडीएम सीदार को सरस्वती को नए सत्र में स्कूल भेजकर निशुल्क हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने कहा। बच्ची की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार के द्वारा उठाने की बात कही। सरस्वती के परिवार के लिए रोजगार की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए।
चेहरे पर लौटी मुस्कान, बोली साथियों को स्कूल जाते देख हो जाती थी दुखी
सांसद बैज के निर्देश पर जब उसे यह पता चला कि वह स्कूल जा सकेगी तो सरस्वती के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान फिर लौट आई। सरस्वती ने बताया कि वह दुखी हो जाती थी जब साथी बच्चियों को स्कूल जाते देखती थी। अब दोबारा वह स्कूल जाकर अपना भविष्य गढ़ सकेगी। उसे उम्मीद है कि अब उसे मजदूरी नहीं करना पड़ेगा। पढ़ लिख कर वह कोई अच्छी नौकरी करेगी ताकि अपने परिवार का ख्याल रख सके।उसने बताया वह बड़ी होकर शिक्षिका बनना चाहती है ताकि वह गांव के दूसरे बच्चों को भी शिक्षित कर सके।