जगदलपुर में होली की रंगीन रचनाओं से खेली होली
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इम्पेक्ट न्यूज। जगदलपुर।
सर्किट हाउस रोड, जगदलपुर में साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में होली के पूर्व गुदगुदाने के लिये कवियों ने भारी उत्साह के साथ अपनी रचनाओं का पाठ किया। गोष्ठी की शुरूआत विपिन बिहारी दास ने अपनी नयी गजलों के साथ की।
हमने दोस्त से दुश्मनी करके भूल बड़ी कर दी।
हमने दुश्मन से दोस्ती करके भूल बड़ी कर दी।
इसके बाद अपनी दूसरी गजल में भी खूब तालियां बटोरी-
रूक जाओ चांद सितारों की रात अभी बाकी है
हसरतें दिल की और जवां रात अभी बाकी है।
अंचल के गीतकार अवधकिशोर शर्मा ने अपनी चुटीली रचनाओं से राजनीति पर कटाक्ष किया। इसके पश्चात नवगीत प्रस्तुत किया-
गूंथ रही है डोकरी माला, बैठी बीच बाजार में
व्यर्थ पूजा की विधि अब सीखना क्या
मैं तुम्हारी आरती का स्वर बनूंगा।
राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिलब्ध अंजली मिश्रा ने अपने सस्वर रचनापाठ से सबका मन मोह लिया।
कान्हा तेरी तस्वीर जिस दिन से लगाई है
जीवन के सब रंग तेरे संग बिताई है।
ऋृषि शर्मा ऋषि ने सस्वर गजलों का पाठ करके माहौल खुशनुमा कर दिया।
डालेश्वरी पाण्डे ने अपनी मधुर आवाज में व्यंग्य रचना का पाठ किया साथ ही हल्बी में भी गीत सुनाया।
हाय हाय रे ये महंगाई/ न नौकरी न लुगाई।
प्रथम बार काव्य गोष्ठी में शामिल हुयीं बकावंड से आयी नीता पाण्डे ने अपनी व्यंग्य रचना एवं मां दंतेश्वरी की स्तुति का पाठ किया।
होली के अवसर पर गुदगुदाती रचनाओं से सुरेन्द्र कुमार सभा को मन मोह लिया।
ममता मधु ने होली के अवसर पर रंगों भी रचना फागुन का पाठ किया। –
गुन हूं मैं/ गोरी तेरा साजन हूं मैं
सूरज कश्यप ने काफी दिनों बाद अपनी रचनाओं का पाठ कर दूसरी पारी का आगाज किया।
कार्यक्रम में जगतदीदी अनिता दीदी, कस्तूरी मिश्रा, श्रीमती शोभा शर्मा और बकावण्ड से आये पाण्डे जी ने अंत तक सबका साथ निभाया। कार्यक्रम का संचालन करते हुये सनत सागर ने अपनी कई रचनाओं से कार्यक्रम में सभी को बांध कर रखा। उन्होंने अपनी व्यग्य रचना में वर्तमान नंगेपन पर प्रहार करते हुये सुनाया –
बूढ़े हो रहे हैं जवान, अंधों में जगी है इक आस/ बाला लजाती सी जबसे, बदल चुकी है अपना लिबास।
अपने कर्म और व्यवसाय में डूबकर कोई किस तरह लिखता है, बताते हुये एक गृहणी द्वारा प्रेम गीत कैसे लिखा जायेगा सुनाया-
कोपर में पड़ी फूली फूली सी कनक से लगते हो
गर्म तवे पर पड़ी पानी की मीठी छनक से लगते हो
रंगहीन स्वादहीन बनती थी अबतक दाल सब्जियां
तुम तो सब्जी में डले गरम मसाले की महक से लगते हो।
सनत सागर ने बताया कि 7 मार्च को होली के पावन अवसर पर संभागीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन सिरहासार में किया जायेगा। अंत में स्वल्पाहार के साथ गोष्ठी समाप्त हुयी।
