Google Analytics Meta Pixel
Tuesday, March 10, 2026
news update
Breaking NewsBusiness

गिरावट की चपेट में सोने की बिक्री, 60% तक घटी डिमांड – आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?

नई दिल्ली
जून में सोने की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 60% गिरकर सिर्फ 35 टन रह गई। कोविड के बाद वॉल्यूम में वे सबसे बड़ी गिरावट है। इसकी वजह यह है कि ऊंची और उतार-चढ़ाव वाली कीमतों की वजह से ग्राहक सोने से दूर रहे। इंडिया बुलियन एंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) ने ये जानकारी दी है। जुलाई में भी सोने के दाम में उतार-चढ़ाव दिख रहा है। अभी कीमतों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। 

IBJA के नैशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता बताया कि हमें डिमांड में तुरंत कोई रिकवरी नहीं दिख रही है। देश भर में सोने के गहने बनाने वाली कई यूनिट्स ने अपना प्रोडक्शन लगभग आधा कर दिया है। उन्होंने कहा कि छोटे प्लेयर्स पर इसका असर पड़ रहा है। सोने के कारोबार के लिए ये काफी मुश्किल वक्त है। डिस्काउंट देने के बावजूद वॉल्यूम डिमांड बढ़ नहीं रही है।

क्यों बढ़ रही है सोने की कीमत
सोने के ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि कि इंटरनैशनल लेवल पर सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की यूरोपियन यूनियन और मेक्सिको पर और टैरिफ लगाने की धमकी है इससे ट्रेड टेंशन फिर से बढ़ गई है। हालांकि, ट्रंप ने 1 अगस्त तक बातचीत का वक्त दिया है, लेकिन हालात के तेजी से बिगड़ने की आशंका ने रिस्क असेट्स को दबाव में रखा है। इससे निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ रुख कर रहे हैं।

IBJA के सुरेंद्र मेहता का कहना है कि उनकी असोसिएशन ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से कई दौर की बातचीत की है, ताकि 9- कैरेट सोने के लिए भी हॉलमार्किंग की सुविधा शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि हमें BIS ने बताया है कि उन्होंने 9 कैरेट जूलरी के लिए हॉलमार्किंग का मॉडल तैयार कर लिया है। हमें उम्मीद है कि सरकार से हॉलमार्किंग के लिए जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी।

सोने की गिरती कीमतों पर क्या बोले एक्सपर्ट्स

केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, सोने के दाम में आई आज की गिरावट की पांच वजहे हैं। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध विराम की घोषणा, अमेरिका ने ईरान पर सैंक्शन में ढील देने के संकेत दिए, रेट कट को लेकर फेडरल रिजर्व का डोविश रुख, घरेलू बाजार में रुपए में आई उछाल और सोने में मुनाफावसूली प्रमुख हैं।

LKP सिक्योरिटी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने सोने की दामों में आई गिरावट के बारे में कारण बताते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम का असर गोल्ड मार्केट पर पड़ा है। सोने में उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। MCX पर इसकी तत्काल सीमा ₹96,000 और ₹98,000 के बीच देखी जा रही है। ₹96,000 से नीचे की निरंतर चाल आगे की गिरावट का संकेत दे सकती है, जबकि ₹98,000 से ऊपर की रिकवरी तेजी भी देखी जा रही है।

जतिन त्रिवेदी ने बताया कि Comex गोल्ड में $25 की गिरावट और रुपये में 0.75% की मजबूती के दोहरे दबाव के कारण भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई। घरेलू सोना लगभग ₹2,000 गिरकर ₹97,350 के करीब कारोबार कर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों के साथ-साथ अमेरिका की आधिकारिक घोषणाओं से भी गिरावट आई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने के साथ ही सोने की सुरक्षित मांग कमजोर पड़ गई है।

बिक्री बढ़ाने को 14 कैरेट का सहारा
दामों में भारी उछाल के बीच अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए जूलर्स अब 14 कैरेट सोने के गहनों को खूब बढ़ावा दे रहे हैं। दरअसल, जूलरी बनाने में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के मुकाबले 14 कैरेट के गहने सस्ते पड़ते हैं। इसकी वजह से ये जूलरी खरीदने वालों के लिए एक ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन बन गया है। ऑल इंडिया जेन एंड जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े का कहना है कि भारत में 14 कैरेट सोने की डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये ट्रेड आगे भी बढ़ेगा, क्योंकि हल्के वजन वाले गहनों की मांग बढ़ रही है। ये खूबसूरती तो देते हैं, लेकिन आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ते।