Friday, January 23, 2026
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असिस्टेंट कलेक्टर की कोशिशों का कमाल! गांव की 410 महिलाओं को टाटा ग्रुप में मिली नौकरी..

इम्पैक्ट डेस्क.

महाराष्ट्र के नांदेड़ के ग्रामीण इलाकों की 400 से अधिक महिलाओं को जिला प्रशासन की एक पहल के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (टीईपीएल) में नौकरी मिली है। इन महिलाओं ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा पास की है। नांदेड़ के सहायक कलेक्टर कीर्तिकिरण पुजार ने इसकी पहल की थी। पुजार मराठवाड़ा में नांदेड़ के किनवट क्षेत्र में एकीकृत आदिवासी परियोजना के प्रमुख भी हैं। पीटीआई ने जिले के एक अधिकारी के हवाले से बताया, “नौकरशाही और कॉरपोरेट जगत 410 महिलाओं को रोजगार देने के लिए एक साथ आए हैं। इन्हें किनवट में प्रतिभा अभियान के दौरान चुना गया था।”

आपको बता दें कि किनवट आदिवासी क्षेत्र है। यह औरंगाबाद से लगभग 360 किमी दूर स्थित है। अधिकारी ने बताया कि पुजार ने टीईपीएल से संपर्क किया और कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने उनके प्रस्ताव पर सहमति दी। इसके बाद छह और सात सितंबर को कैंप का आयोजन किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा पास करने वाली कम से कम 600 महिलाओं ने इस अभियान में भाग लिया। इनमें से 410 का चयन किया गया। चयनित महिलाएं पड़ोसी राज्य कर्नाटक के होसुर में टीईपीएल की निर्माण इकाई में काम करेंगे। अधिकारी ने कहा कि उन्हें पहले बेंगलुरु में अपना प्रशिक्षण पूरा करना होगा।

आपको बता दें कि आमतौर पर इन इलाकों में लड़कियों की जल्दी शादी कर दी जाती है। इस प्रथा को समाप्त करने के लिए पुजार ने यह पहल की। 

तलाइगुडापाड़ा गांव के रहने वाले राजाराम मडावी को आज अपनी बेटी की नौकरी पर गर्व हो रहा है। मडावी ने कहा, “हमारी पीढ़ी के लोगों ने कभी भी तहसील से बाहर कदम नहीं रखा है। लेकिन जिला प्रशासन की पहल की बदौलत मेरी बेटी को बेंगलुरू जाने का मौका मिल रहा है और वह भी नौकरी के लिए।” हिमायतनगर के वाशी गांव की शीतल भिसे भी नौकरी पाकर काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, “मेरे जैसी महिलाएं अपने परिवार के लिए कुछ करना चाहती हैं, लेकिन हमें ऐसा करने के लिए एक मौका चाहिए। मुझे यह अवसर एकीकृत विकास परियोजना और टीईपीएल के अधिकारियों की मदद से मिला है। मैं काम करते हुए आगे की पढ़ाई भी करूंगी।” 

इस पहल के बारे में बोलते हुए पुजार ने कहा, “सरकारी नौकरी में काम करते हुए हमें समाज को वापस देने का मौका मिलता है। मैंने टाटा समूह से संपर्क करने की कोशिश की और इसका परिणाम मिला।”

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