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छत्तीसगढ़ विधानसभा में धरसींवा क्षेत्र के जल प्रदूषण मुद्दे पर ध्यानाकर्षण चर्चा…

इम्पेक्ट न्यूज़। रायपुर।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में धरसींवा क्षेत्र के जल प्रदूषण मुद्दे पर गरमागरम चर्चा हुई। धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने ग्राम पठारीडीह एवं आसपास के छह गांवों में भूमिगत जल के गंभीर प्रदूषण की समस्या को सदन का ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अशुतोष इंजीनियरिंग वर्क्स सहित चार अन्य गैल्वनाइजिंग इकाइयां रासायनिक अपशिष्ट को अवैध रूप से जमीन में निस्तारित कर रही हैं, जिससे कई बोरवेल प्रभावित हो गए हैं और ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है। श्री शर्मा ने Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 तथा Environment (Protection) Act, 1986 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कठोर कार्रवाई, निरंतर निगरानी और उल्लंघन करने वाली इकाइयों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

उन्होंने आगे Influent Treatment Plant की निरंतर कार्यक्षमता, Zero Liquid Discharge व्यवस्था का अनुपालन, नियमित परीक्षण रिपोर्ट, भूजल निगरानी कुओं की स्थापना और माप की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

जवाब में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 15 दिसंबर 2025 को प्रभावित उद्योगों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में दूषित जल उपचार संयंत्र (ETP) क्रियाशील पाया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा 38 जल स्रोतों के परीक्षण में 35 पूरी तरह मानकों के अनुरूप थे; मात्र तीन में मामूली विचलन था, जिनके लिए तुरंत शुद्ध जल आपूर्ति की व्यवस्था की गई।

मंत्री ने बताया कि हाईटेक इंडस्ट्रियल सोल्यूशन, बारबरी टायर, APF अपोलो ट्यूब्स आदि इकाइयों पर आवश्यक निर्देश जारी किए गए, उत्पादन निलंबन के साथ 2.35 लाख से 19.74 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। वर्ष 2024-25 में 8 तथा 2025-26 में 15 जल प्रदूषण संबंधी प्रकरणों में कुल 26 कार्यवाहियां की गईं।

श्री चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि सभी शिकायतों पर त्वरित जांच होती है और त्रैमासिक निरीक्षण का सिलसिला जारी है। गैल्वनाइजेशन प्रक्रिया से निकलने वाले स्पेंट एसिड एवं स्लज का निपटान Common Treatment Storage and Disposal Facility तथा सीमेंट उद्योगों में सह-प्रसंस्करण के माध्यम से सुरक्षित रूप से किया जा रहा है। यदि किसी क्षेत्र में अनियमितता का संदेह हो तो तुरंत सूचना देने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर PHED द्वारा स्वतंत्र टीम गठित कर सघन निगरानी की जाएगी।

विधायक अनुज शर्मा द्वारा उठाए गए इस महत्वपूर्ण जन स्वास्थ्य मुद्दे पर मंत्री के विस्तृत जवाब के साथ चर्चा समाप्त हुई। सदन ने प्रदूषण नियंत्रण और ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में सतत प्रयासों का संकल्प दोहराया।