बसंत पंचमी के दौर में छत्तीसगढ़ का उत्सव राग… सरकार के तीन ऐसे फैसले जिसकी प्रशंसा से सोशल मीडिया भर गया है…
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सुरेश महापात्र।
बस अब दो बरस बाद छत्तीसगढ़ मेंं सरकार चुनावी मोड पर आ जाएगी। 2026 की शुरूआत के साथ ही कुछ बड़े फैसलों ने सरकार को सकारात्मक परिणाम दिए हैं। इसमें पहली है रायपुर जिला में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करते हुए डा. संजीव शुक्ला को पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया जाना और दूसरा फैसला जो ठीक बसंत पंचमी से पहले लिया गया वह है मुख्यमंत्री के मीडिया से संबंधित मामलों में सलाहकार के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार आर कृष्णा दास की नियुक्ति का। इन दोनों फैसलों का करतल ध्वनि के साथ स्वागत सोशल मीडिया में साफ दिखाई दिया। तीसरा बड़ा काम दस बरस बाद राजधानी रायपुर में रायपुर साहित्य महोत्सव का आयोजन किया जाना।
इन तीनों कारणों से सरकार की छवि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता दिख रहा है। बसंत पंचमी के अवसर पर रायपुर साहित्य महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के भाषण की प्रशंसा हो रही है। संभवत: उन्होंने साहित्य के मंच से अपना सबसे लंबा उद्बोधन दिया है। इसकी भाषा और शैली के साथ—साथ विषय की प्रासंगिकता की सराहना हो रही है। उद्घाटन सत्र में दर्शक दीर्घा में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री को सुनते हुए यह आभास हुआ कि साहित्य के प्रति उनका नजरिया बेहद स्पष्ट है। विशेषकर छत्तीसगढ़ के साहित्य की बुनियाद को लेकर वे बेहद आशान्वित भी हैं।
संयोग ही था कि इस कार्यक्रम में शामिल होने जाते हुए नया रायपुर में अपने रिट्ज वाहन से स्वयं ड्राइव करते हुए नव नियुक्त मीडिया सलाहकार आर कृष्णा दास दिखे। मैं और डा. अवधेश मिश्रा उनके साथ सवार हो गए। मैंने उनसे कहा कि आप जब कार्यभार संभाल लेंगे तो तस्वीर दे दीजिएगा। तो उनका जवाब मुझे प्रेरणादायक लगा। उन्होंने कहा ‘मेरी नियुक्ति माननीय मुख्यमंत्री जी के लिए मीडिया की भूमिका देखने के लिए है। मैं चाहूंगा कि मेरे आने से उन्हें लाभ हो… मेरी तस्वीर प्रकाशित करवाना उचित नहीं होगा।’
जरा सोचिए आज के दिन में ऐसे लोग कहां देखने को मिलेंगे। जिनकी नियुक्ति को लेकर पूरा सोशल मीडिया जिसमें हर तरह के पत्रकार प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं ऐसा मैंने कम ही देखा है। यदि किसी के मन में आरकृष्णा दास को लेकर किसी प्रकार का भ्रम है तो मैं चाहूंगा कि वे एक बार उनसे मिलकर बात करके देख लें। ऐसा व्यक्ति कम ही देखने को मिलता है।
कहने का आशय साफ है कि जिस भी प्रकार से इस नियुक्ति के लिए ताना—बाना बुना गया हो पर यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब विपक्ष में कांग्रेस पूरी तरह से आक्रामक होकर मीडिया के बड़े हिस्से में छाई हुई है। धान के मुसवा कांड को लेकर तमाम मीम्स सोशल मीडिया में छाए हुए हैं। इससे साफ है कि दास की चुनौती बड़ी है मीडियाकर्मियों का उनके प्रति भाव और सरकार के मुखिया के लिए एक सलाहकार के तौर पर उनकी नियुक्ति के बाद कम से कम ऐसे विवादित राजनैतिक प्रचार के मामलों में सरकार को ज्यादा लाभ मिल सकता है।
बसंत पंचमी के दिन ही रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नर प्रणाली का आगाज हुआ। बिलासपुर के आईजी और 2004 बैच के आईपीएस डा. संजीव शुक्ला का नाम इसी के साथ इतिहास में भी दर्ज हो गया। उन्होंने रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में अपनी जिम्मेदारी को संभाल लिया। इसके बाद सोशल मीडिया में डा. शुक्ला को लेकर तमाम सकारात्मक पोस्ट देखने को मिले। विपक्षी कांग्रेसी खेमे से भी पहले पुलिस कमिश्नर के लिए प्रशंसा के शब्द देखने के बाद लगा कि 2026 विष्णुदेव सरकार के लिए बेहद परिणाम मूलक हैं।
इसी बरस जनवरी में ही छत्तीसगढ़ के भाजपा प्रभारी नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद एक नया वातावरण देखने को मिल रहा है। नितिन नवीन को 6 जुलाई 2024 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का छत्तीसगढ़ प्रभारी नियुक्त किया गया था। इससे पहले, वह मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी थे, और 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान सह-प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के तमाम इलाकों में चुनाव से पहले सक्रिय नितिन नवीन के दौर में ही मुख्यमंत्री के तौर पर विष्णुदेव साय सत्ताशीन हुए। अब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो स्वाभाविक तौर पर यह मुख्यमंत्री के लिए बेहद सकारात्मक परिणाम देने वाला दौर है।
इस समय रायपुर में रायपुर साहित्य महोत्सव का कार्यक्रम चल रहा है। पूरे प्रदेश के हर कोने से आंचलिक साहित्कारों का पुरखौती मुक्तांगन में जमावाड़ा है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक बड़ी संख्या में साहित्कारों की सहभागिता दिखाई दे रही है। उद्घाटन सत्र में राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने नए दौर को साहित्य में समाहित करने के लिए प्रेरित किया। वे विशेषकर 2014 के बाद हो रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बदलावों को लेकर साहित्यकर्मियों को संदेश दिया कि इस दौर को लेकर साहित्य की रचनाधर्मिता उत्प्रेरक होनी चाहिए।
रायपुर साहित्य उत्सव के मंच को तैयार करने में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की परिकल्पना को साकार करने में इसके लिए गठित समिति जिसमें छत्तीसगढ़ साहित्य शंशांक शर्मा और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने पूरी ताकत झोंक दी। इस आयोजन के लिए जनसंपर्क विभाग के सचिव डा. रोहित यादव और आयुक्त जनसंपर्क डा. रवि मित्तल ने हर बारिकी को ध्यान में रखकर आयोजन स्थल का संयोजन तैयार किया।
मैं चूंकि 2015 के आयोजन में भी शामिल हुआ था तो फर्क साफ दिखाई दिया। अक्सर साहित्यिक आयोजनों के बाद जिस तरह की बहस होती है उससे सरकारें ऐसे आयोजनों से परहेज करतीं हैं। कौन साहित्यकार है और कौन नहीं का विषय तो रहता ही है साथ ही किसे कितना पारिश्रमिक दिया गया और इसका निर्धारण किए तरह से किया गया? यह सवाल भी उठाया जाता रहा है। संभवत: रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में इस तरह के मामलों को लेकर कम बहस होगी। उद्घाटन मंच संचालन में छत्तीसगढ़ की बेटी नम्रता वर्मा की क्षमता का प्रदर्शन अलौकिक रहा।
रायपुर में आयोजित इस उत्सव में हर किसी को शामिल होना चाहिए। यह अवसर है अपने भीतर तैयार हो रहे साहित्यकार को मंच देने के लिए और आने वाले समय में अपने लेखन और संवाद के माध्यम से नया आयाम छूने के लिए तैयार करने के लिए…
