समग्र शिक्षा: व्यावसायिक शिक्षक भर्ती विवाद पर कार्यभार ग्रहण रोका…
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इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर, 1 अगस्त 2025:
छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा अभियान के तहत व्यावसायिक शिक्षकों की नई नियुक्तियों को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच समग्र शिक्षा के उप संचालक राजेश सिंह ने व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि छह वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर (VTP) कंपनियों द्वारा नियुक्त 1500 से अधिक नए व्यावसायिक शिक्षकों को अगले आदेश तक स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया जाए। यह माना जा रहा है कि यह मैसेज मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय गठित समिति की अनुशंसा है जिन्हें 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी।
विवाद का कारण
नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और योग्यता मानदंडों की अनदेखी के आरोपों ने इस विवाद को जन्म दिया। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि चयन प्रक्रिया में भारत सरकार की 24 मार्च, 2017 की गाइडलाइनों का पालन नहीं किया गया। इन गाइडलाइनों में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार, और प्रायोगिक टेस्ट के साथ-साथ सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) प्रमाणन और उद्योग अनुभव को अनिवार्य बताया गया है। आरोप है कि कुछ VTP कंपनियों ने अयोग्य उम्मीदवारों को पैसे का लेन देन करके नियुक्त किया, जिनके पास न तो पर्याप्त अनुभव था और न ही आवश्यक प्रमाणन। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा।
सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन
2017 की गाइडलाइनों के अनुसार, VTP को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन ढांचा (NQAF) स्तर 2 या उससे ऊपर की मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सभी छह VTP इस मानदंड को पूरा करते थे। चयन प्रक्रिया में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की समिति की अनिवार्य भागीदारी पर भी सवाल उठे हैं। कई उम्मीदवारों ने बताया कि लिखित या प्रायोगिक परीक्षण आयोजित नहीं किए गए, जो गाइडलाइनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
सरकार की त्वरित कार्रवाई
विवाद के बाद समग्र शिक्षा विभाग ने तत्काल कदम उठाए। तीन सदस्यीय उप संचालक की समिति गठित कर किया गया जांच समिति द्वारा 48 घंटे में रिपोर्ट देना था ।
जबकि सरकार को एक उच्च स्तरीय जांच उस रिपोर्ट के आधार पर करना चाहिए जिसमें VTP की चयन प्रक्रिया, और नियुक्त शिक्षकों की चयन और योग्यता की जांच का जिम्मा सौंपा जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कमी पहले से ही एक गंभीर समस्या है। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, 212 प्राथमिक और 48 पूर्व माध्यमिक स्कूल पूरी तरह शिक्षक-विहीन हैं, जबकि 6,872 स्कूल एकल शिक्षक पर निर्भर हैं। व्यावसायिक शिक्षा, जो छात्रों को उद्योग-उन्मुख कौशल प्रदान करती है, इस विवाद के कारण और प्रभावित हो सकती है। कई स्कूलों में पहले से ही व्यावसायिक शिक्षकों की कमी के कारण पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो रहा है।
हाईकोर्ट की निगरानी
शिक्षकों की कमी का मुद्दा पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के संज्ञान में है। सितंबर 2024 में कोर्ट ने सरकार से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इस नए विवाद ने कोर्ट की निगरानी को और तीव्र कर दिया है। राजनांदगांव में छात्राओं द्वारा शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी के कथित दुर्व्यवहार ने भी इस मामले को सुर्खियों में लाया था।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान पारदर्शी जांच और गाइडलाइनों के कड़ाई से पालन पर निर्भर करता है। समग्र शिक्षा विभाग को VTP की मान्यता और चयन प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी जैसे सुधार लागू करने चाहिए। साथ ही, शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अंतरिम व्यवस्था, जैसे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, पर विचार किया जाना चाहिए।
छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
रायपुर के एक अभिभावक रमेश साहू ने कहा, “हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर है। व्यावसायिक शिक्षा से उन्हें रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शिक्षकों की कमी और भर्ती घोटाले ने सब बिगाड़ दिया।” छात्र संगठनों ने भी जांच में तेजी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह प्रकरण छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। जांच समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम इस विवाद के समाधान और व्यावसायिक शिक्षा के भविष्य को तय करेंगे।
