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10 माह में ना मंत्री बदले, ना सरकार बदली… बदले बस अफसर… डिजिटल प्लेटफार्म बदलकर​ फिर हो रही खर्च की तैयारी… शिक्षक हलाकान…

इम्पेक्ट न्यूज. रायपुर।

अगर आपसे यह कहा जाए कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग एक पैसा कमाने की प्रयोगशाला के तौर पर काम कर रहा है। इसी शैक्षणिक सत्र की शुरूवात में सरकार एप लांच करती है और उसमें लाखों पुस्तकों को क्यूआर कोड के साथ अपलोड किया जाता है ताकि बच्चों को आफ और आन लाइन पढ़ने की सुविधा दी जा सके… सरकार भूल जाती है कि जिस प्रयोग के नाम पर अभी वाहवाही बटोरने की कोशिश हो रही है ऐसे ही एक प्रयोग पर वह करीब दस माह पहले ही वाहवाही बटोर चुकी है। मसला कुछ नहीं अफसर के बदलने के साथ ही पैसों के खेल से जुड़ा है। जिस काम के लिए पहले खर्च किया जा चुका है अब उसी काम को दूसरे तरीके से करने के लिए खजाने की चाबी तलाशी जा रही है।

दोनों कार्यक्रमों के लिए बकायदा सरकारी विज्ञप्ति जारी हुई है। सीजी इम्पेक्ट ने 22 जून 2019 और 11 अप्रेल 2020 को जारी जन संपर्क विभाग द्वारा जारी सरकारी विज्ञप्ति पाठकों के लिए जस का तस प्रस्तुत किया है। हो सकता है कि सरकार के मुखिया इस बात से वाकिफ ना हो कि उनके अफसर एक ही काम को जो पहले से जारी है उसकी पूरी फाइल समेटकर नई फाइल चलाकर खजाने में सेंध मारने का काम कर रहे हों।

सवाल यह नहीं है बल्कि सवाल इससे बड़ा है प्रदेश के शिक्षक संवर्ग के लोग इस प्रक्रिया से कितने प्रभावित होंगे इसका अंदाजा भी शायद ही लगाने की कोशिश की गई। बस थोड़ी नई खूबियों के साथ नया वेबसाइट और नया एप जारी कर दिया गया। पर हां दोनों का उद्देश्य समान है। यानी केवल नियंत्रक अफसर के बदलने के बाद करोड़ों के खेल की नई दिशा तलाशी गई।

‘पढ़ई तुंहर दुआर’: शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण

रायपुर, 11 अप्रैल 2020/ राज्य शासन द्वारा राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा विकसित घर पर रहकर पढ़ाई की योजना ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ को स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद और डाइट के सभी प्राचार्यों को शिक्षकों का ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।  उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्कूली बच्चों को घर पर ही रहकर पढ़ने के लिए देश के सबसे बड़े ऑनलाईन शिक्षा पोर्टल में से एक ’पढ़ई तंुहर दुआर’ का शुभारंभ बीते 7 अप्रैल को किया था। इस पोर्टल के जरिए लाखों छात्र बिना किसी शुल्क के ऑनलाईन पढ़ाई की सुविधा शासन द्वारा उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की गई है। यह शिक्षा पोर्टल लॉकडाउन के साथ ही आने वाले समय में बच्चों को निरंतर पढ़ाई के लिए उपयोगी होगा। इस ई-लर्निंग प्लेटफार्म में ऑनलाईन इंटरएक्टिव कक्षाओं के जरिए शिक्षक और बच्चे अपने-अपने घरों से ही वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अध्ययन-अध्यापन करा सकेंगे। यह छत्तीसगढ़ राज्य के छात्रों सहित हिन्दी भाषी राज्यों के लिए भी बहुत लाभदायक होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट सीजीस्कूलडॉटइन (cgschool.in) पर कक्षा पहलीं से 10वीं तक विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इस पोर्टल का विस्तार भी आगे की कक्षाओं के लिए किया जा रहा है। निकट भविष्य में 11वीं व 12वीं के विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे है। 
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने संचालक लोक शिक्षण को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक शिक्षकों और विद्यार्थियों को इससे जोड़ा जाए। इसके साथ ही योजना की सतत मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए गए है। मिशन संचालक समग्र शिक्षा को इस योजना को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए है। संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को इस योजना के पाठ्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा इसकी सतत् मॉनिटरिंग के साथ ही शिक्षकों को शैक्षणिक वीडियो, ऑडियो एवं अन्य शैक्षिक सामग्री बनाने सहयोग करने के निर्देश दिए है। प्रमुख सचिव ने राज्य के शिक्षकों के लिए ऑनलाईन प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए है। सभी संभागीय आयुक्त और कलेक्टरों को योजना की सतत मॉनिटरिंग करने कहा गया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिले के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस योजना में जोड़ने का प्रयास करें। सभी डाइट के प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डाइट के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों को शैक्षणिक वीडियो, ऑडियो और अन्य शैक्षणिक सामग्री बनाने में सहायता करने के साथ ही सामग्री की गुणवत्ता भी सुनिश्चित करें। इसके लिए शिक्षकों के ऑनलाईन प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएं। 

अब देखिए 22 जून 2019 की जनसंपर्क विभाग की प्रेस विज्ञप्ति

नए शिक्षा सत्र से स्कूलों में अभिनव पहल 

शैक्षणिक पाठ्य सामग्री अब वीडियो, ऑडियो, पीपीटी और पीडीएफ के रूप में भी होगी उपलब्ध

रायपुर, 22 जून 2019/ स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता की दिशा में राज्य को अग्रसर बनाने के लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा आगामी शिक्षा सत्र से अभिनव पहल की जा रही है। पाठ्य पुस्तकों की पारंपरिक दुनिया से आगे सक्रिय पाठ्य पुस्तक (Energized Text Book) तैयारी के लिए नवीनतम सूचना तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। 

राज्य में हिन्दी माध्यम की कक्षा पहली से दसवी तक विभिन्न विषयों की 67 किताबें तैयार कर इनकी दो करोड़ 83 लाख एक हजार 216 प्रतियां मुद्रित कर विद्यार्थियों तक पहंुचाई गई हैं। इन पुस्तकों में तीन हजार चालीस क्यूआर कोड अंकित किए गए है। इससे विभिन्न पाठ्य सामग्रियों के वीडियो, आॅडियो, पीपीटी और पीडीएफ के रूप में रोचक सामग्री प्रस्तुत की गई हैं। यह विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों के लिए उपयोगी होगी। मोबाइल पर क्यू.आर. कोड स्केन कर संबंधित पाठ से अतिरिक्त प्रश्न एवं उत्तर और अन्य जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 

बच्चों को उनकी भाषा में पाठ्य सामग्री प्राप्त हो और शिक्षा आनंददायी बन सकें इस उद्देश्य से क्यू.आर. कोड के लिए विशेष आकर्षण बहुभाषा में पाठ्य सामग्री का विकास करना भी है। हल्बी, सरगुजिहा, कुडूख, दंतेवाड़ा गोंडी, कांकेर गोंडी सहित छत्तीसगढ़ी भाषा में वीडियो तैयार किए गए हैं।

सक्रिय पाठ्य पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य पाठ्यचर्या से संबंधित अतिरिक्त सामग्री उपलब्ध कराना है। जो पठन-पाठन में मदद करने के साथ कक्षा के पाठ्य पुस्तकों के अलावा विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सामग्री प्राप्त करने की सुविधा देगा। यह शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सीखने की आवश्यकता की पूर्ति करती है। एकल शिक्षकीय शालाओं के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। सक्रिय पाठ्य पुस्तकों का उपयोग आॅफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। इसका बुनियादी ढांचा मल्टीचैनल है।

इसे पीसी, मोबाईल-फोन, टेबलेट जैसे विभिन्न प्रारूपों पर प्राप्त किया जा  सकता हैं। डिजिटल इंफ्राॅस्ट्रक्चर आॅन नाॅलेज शेयरिंग (दीक्षा) पोर्टल शिक्षकों को स्वयं निर्देशित करने में मदद करेगा। इसका विशेष आकर्षण आकलन भी है। अभ्यास में अंकित क्यू.आर. कोड पर रोचक प्रश्न भी दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थी खेल-खेल में सीखने का आकलन कर सके। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) द्वारा आयोजित चैम्पियन राज्यों में अग्रणी स्थान बनाकर छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे ज्यादा पुस्तकों के साथ कार्य कर रहा है। इन पाठ्य पुस्तकों को उपयोग करने के लिए प्ले-स्टोर से दीक्षा एप डाउनलोड कर सकते हैं।

इन दोनों विज्ञप्तियों के अध्ययन से यह तो स्पष्ट हो ही चुका होगा कि यदि किसी एक एप पर पहले से ही छत्तीसगढ़ पाठ्यक्रम के पुस्तकों की उपलब्धता है और यह एप शिक्षकों के पास दर्ज है तो नए एप और नए सिरे से दूसरे एप को प्लेटफार्म बनाने की कोशिश क्यों की गई।

शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना

विभाग में पुस्तकों को पुन: पीडीएफ व डिजिटल फार्मेट में बनाकर एप के माध्यम से प्रस्तुत किया जाना है। यह कार्य मुफ्त में तो होने से रहा। इस कार्य से पहले से ही शिक्षा विभाग में कई तरह के एनजीओ को संलग्न कर दिया गया है। साथ ही कई कन्सल्टेंट भी नियुक्त किए गए हैं। इसमें सरकार व्यय आज नहीं तो कल होना तय है।

सबसे बड़ी बात शिक्षा विभाग में अफसरों के बदलने के साथ ही हो रहे डिजिटल परिवर्तन का विभागीय शिक्षकों पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं जिसकी पड़ताल शासन को अपने स्तर पर करना चाहिए।

करीब दस माह पहले इसी परियोजना में करोड़ों रूपए खर्च किए जा चुके हैं जिससे यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि प्रक्रिया का रिपिट होगी तो व्यय भी होगा ही। भले ही इस तथ्य को शिक्षा विभाग के आला अफसर मुख्यमंत्री से छिपाने में कामयाब हो गए हों…

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