Friday, March 6, 2026
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कौन हैं सैयद अता हसनैन? 40 साल सेना में, कश्मीर में ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ लागू करने वाले अब बिहार के राज्यपाल

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  • सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बिहार के राज्यपाल बने।

  • 40 साल सेना में सेवा, कश्मीर में ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ लागू किया।

  • 15वीं कोर की कमान संभाली, सैन्य सचिव पद से सेवानिवृत्त।

डिजिटल डेस्क, पटना।

सैयद अता हसनैन Appointed Bihar Governor बिहार में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव का दौर जारी है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक हलचल तेज है और मुख्यमंत्री पद को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी रहे हैं।

उन्होंने अपने करीब 40 वर्षों के सैन्य करियर में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में उनकी रणनीति और नेतृत्व की काफी सराहना हुई है।

कश्मीर में 15वीं कोर की कमान से मिली पहचान
सेना में सेवा के दौरान सैयद अता हसनैन ने जम्मू-कश्मीर में 15वीं कोर की कमान संभाली थी। इस दौरान उन्होंने कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने पर जोर दिया।

उन्होंने ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ यानी जन-केंद्रित नीति को लागू किया। इस रणनीति का उद्देश्य सुरक्षा अभियान के साथ आम लोगों से संवाद और सहयोग बढ़ाना था। इसके तहत सद्भावना कार्यक्रम और सामाजिक पहल भी चलाए गए। इस नीति को घाटी में उग्रवाद कम करने की दिशा में प्रभावी माना गया।

कई कठिन इलाकोंमें निभाई जिम्मेदारी
अपने सैन्य करियर में हसनैन ने देश के कई संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा दी। उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के साथ भी काम किया। पंजाब में उग्रवाद के दौर में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर में कई बार तैनाती रही। सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी यूनिट की कमान संभाली। इन अनुभवों ने उन्हें एक कुशल सैन्य रणनीतिकार के रूप में पहचान दिलाई।

2013 में सैन्य सचिव पद से हुए सेवानिवृत्त
करीब चार दशक तक सेना में सेवा देने के बाद सैयद अता हसनैन वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के समय वे सेना मुख्यालय में मिलिट्री सेक्रेटरी यानी सैन्य सचिव के पद पर कार्यरत थे।

इस पद पर रहते हुए उन्होंने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति और पदस्थापन से जुड़े अहम निर्णयों में भूमिका निभाई। सेना में उनका करियर नेतृत्व और रणनीतिक सोच के लिए जाना जाता है।

उनकी सेवाओं के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी मिले। इनमें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) और उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) प्रमुख हैं।

शिक्षा और बौद्धिक क्षेत्र में भी सक्रिय
सेवानिवृत्ति के बाद भी सैयद अता हसनैन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। उन्हें 2018 में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था।

इसके अलावा वे रक्षा और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। वे विभिन्न मंचों पर व्याख्यान देते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर लेख लिखते हैं।

हसनैन ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज और लंदन के किंग्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है। रणनीतिक सोच और शांति स्थापना के प्रयासों के लिए उन्हें व्यापक पहचान मिली है।