Saturday, January 24, 2026
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अति-दुर्लभ बीमारी: सात महीने के बच्चे में ‘बेंटा’ की पुष्टि… दुनिया में केवल 13 लोगों को है यह रोग, बचाने की मुहिम शुरू…

इंपैक्ट डेस्क.

सात महीने के एक बच्चे विजयेंद्र में ‘बेंटा’ नामक एक बेहद दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई है। विश्व में इस इम्यूनो-डेफिशियंसी समस्या के केवल 13 मामले हैं। बेंटा इसका 14वां मरीज माना गया है। उसके इलाज के लिए ब्लड स्टेम सेल डोनर की जरूरत है, जिसकी तलाश में ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया है। बच्चे को बचाने के लिए उसकी मां रेखा ने सभी से निवेदन किया है कि वे ऑनलाइन आवेदन भरकर अपने गाल के भीतरी हिस्से से लिए स्वैब सैंपल भेजें। उन्हाेंने कहा, ‘इस काम में केवल पांच मिनट लगेंगे, लेकिन मेरे बेटे का जीवन बच जाएगा।’

यह बीमारी अनुवांशिक म्यूटेशन की वजह से होती है। विजयेंद्र को बचाने के लिए सेल प्रत्यारोपण ही किया जा सकता है। इसमें मैचिंग ब्लड स्टेम सेल डोनर मिलना सबसे अहम है। बेंगलुरु में इस प्रत्यारोपण का पंजीकरण करने वाली संस्था डीकेएमएस-बीएमएसटी फाउंडेशन के अनुसार मैचिंग डोनर की तलाश हो रही है। वहीं रेखा ने बताया कि वे पूरी तरह हताश हैं। बेटे कोे दर्द से गुजरता देख खुद को टूटता महसूस कर रही हूं। उपयुक्त डोनर की तलाश न हो पाने से वे चिंतित हैं। बेंटा एक बेहद दुर्लभ बीमारी है, इसलिए इसका इलाज भी प्रयोग के तौर पर करने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा विशेष दवाओं का उपयोग नहीं होता। इस दौरान मरीज पर हो रहे असर को देखते हुए इलाज आगे बढ़ाया जाता है।

सबसे कम उम्र का बेंटा मरीज
फाउंडेशन ने बताया कि बेंगलुरू के एक प्रमुख अस्पताल के चिकित्सक डॉ. स्टालिन रामप्रकाश विजयेंद्र का इलाज कर रहे हैं। उन्हाेंने दावा किया कि विजयेंद्र विश्व में सबसे कम उम्र का बेंटा मरीज है। शुरुआती स्टेज में उसकी बीमारी सामने आ गई।

आबादी के 0.04 फीसदी ही डोनर के तौर पर पंजीकृत
डोनर की तलाश में शुरू हुए ऑनलाइन अभियान में लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पंजीकरण करवाने और सैंपल देने के लिए कहा जा रहा है। डीकेएमएस-बीएमएसटी के सीईओ पैट्रिक पॉल ने बताया कि भारत की आबादी का 0.04 प्रतिशत ही स्टेम ब्लड सेल डोनेशन के लिए संभावित डोनर के तौर पर पंजीकृत है। 

जिन लोगों में कार्ड11 नामक अनुवांशिक म्यूटेशन है, उनके बच्चे में बेंटा होने की आशंका 50 प्रतिशत तक रहती है। इसकी पहचान कम उम्र में आमाशय के पास मौजूद तिल्ली में सूजन और कान, साइनस व फेफड़ों मे बार बार संक्रमण हो सकती है।

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