छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में वरिष्ठ पदों की रिक्तियाँ और प्रभारी व्यवस्था: सुशासन पर सवाल…
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इम्पेक्ट न्यूज़। रायपुर।
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में वर्तमान में युक्ति युक्तकरण को लेकर बवाल मचा हुआ है। कई जगहों पर काउंसलिंग और पोस्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह जिन अधिकारियों द्वारा यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है उनके प्रति शिक्षकों का अविश्वास है। दरअसल नियमित पदोन्नति अटकने के कारण प्रभारी ही इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। शिक्षा विभाग स्थापना को लेकर ढांचागत व्यवस्था पर यह रिपोर्ट है।
वरिष्ठ प्रशासनिक पदों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। संचालक, अतिरिक्त संचालक, संयुक्त संचालक, उप संचालक और प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से रिक्तियाँ बनी हुई हैं, और विभाग प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है, बल्कि सुशासन और नीति कार्यान्वयन पर भी गंभीर सवाल उठा रही है।
संचालक (IAS) और संचालक (विभागीय)
– संचालक (IAS): यह विभाग का सर्वोच्च पद है, जिस पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा नियुक्ति की जाती है। इस पद पर हमेशा कोई न कोई IAS अधिकारी निय नियुक्त रहता है।
– संचालक (विभागीय): यह पद विभागीय पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता है, लेकिन पिछले 7-8 वर्षों से यह रिक्त है। छत्तीसगढ़ के 25 वर्षीय इतिहास में यह पद ज्यादातर समय खाली रहा है। केवल प्रतिमा अवस्थी और बी.एस. मरावी ने इस पद पर 3-4 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में यह पद रिक्त है, जिससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
अतिरिक्त संचालक
– पदों की स्थिति: विभाग में अतिरिक्त संचालक के कुल 3 स्वीकृत पद हैं— एक लोक शिक्षण संचनालय में, एक SCERT में, और एक समग्र शिक्षा योजना में। ये सभी पद पिछले 8 वर्षों से रिक्त हैं। SCERT और समग्र शिक्षा में प्रभारी व्यवस्था से काम चल रहा है, लेकिन लोक शिक्षण संचनालय में यह महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है।
– चुनौती: अतिरिक्त संचालक का पद विभागीय पदोन्नति से भरा जाना है, लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।
संयुक्त संचालक
– पदों की संख्या: संयुक्त संचालक के लगभग 12 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से कुछ पदों की गणना विवादास्पद रही है। उदाहरण के लिए, समग्र शिक्षा के लिए स्वीकृत अस्थायी पदों को भी विभागीय पदोन्नति में शामिल किया गया।
– वर्तमान स्थिति: 2018 में अंतिम बार 14 उप संचालकों को संयुक्त संचालक के पद पर पदोन्नत किया गया था। वर्तमान में केवल 3 पूर्णकालिक संयुक्त संचालक कार्यरत हैं। पांच संभागों में से केवल बस्तर संभाग में पूर्णकालिक संयुक्त संचालक हैं, जबकि अन्य संभागों में उप संचालक प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
– रिक्तियाँ: 9 से 11 पद रिक्त हैं। 1 जुलाई 2025 तक केवल 13 उप संचालक शेष रहेंगे, जो इस रिक्ति को भरने के लिए अपर्याप्त हैं।
– विवाद: तीन संयुक्त संचालकों में से एक पर गंभीर आरोपों के तहत विभागीय जाँच चल रही है, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति तक कोई कार्रवाई होने की संभावना कम है। यह विभागीय जाँच की पारदर्शिता और सुशासन पर सवाल उठाता है।
उप संचालक
– पदों की संख्या: अप्रैल 2022 तक उप संचालक के 57 पद थे, जो 5 नए जिलों के निर्माण के बाद बढ़कर 62 हो गए हैं। इनमें 33 जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और 22 डाइट प्राचार्य के पद शामिल हैं, शेष SCERT और लोक शिक्षण संचनालय के लिए हैं।
– वर्तमान स्थिति: सभी जिला शिक्षा अधिकारी के पद और अधिकांश डाइट प्राचार्य के पद प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहे हैं। केवल 2-3 डाइट प्राचार्य पूर्णकालिक हैं।
– चुनौती: यह पद भी विभागीय पदोन्नति से भरा जाता है, लेकिन निकट भविष्य में पदोन्नति की कोई संभावना नहीं दिख रही।
प्राचार्य
– पदों की संख्या: लगभग 4,500 प्राचार्य पदों में से केवल 2,900 पदों पर ही पदोन्नति हुई है। इनमें से 500 से अधिक लोग विभागीय प्राचार्य हैं, जबकि शेष पदों पर व्याख्याता प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्य कर रहे हैं।
– कानूनी विवाद: प्राचार्य पदों की पदोन्नति का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, जिसके कारण यह प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
सुशासन पर प्रभाव
– प्रशासनिक अक्षमता: वरिष्ठ पदों की रिक्तियाँ और प्रभारी व्यवस्था के कारण नीति निर्माण, कार्यान्वयन, और पर्यवेक्षण में गंभीर बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं। संचनालय स्तर पर रिक्त पदों के कारण नियम-निर्देशों का पालन और निगरानी प्रभावित हो रही है।
– पदोन्नति में देरी: विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया में 7-8 वर्षों से कोई प्रगति नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल कम हो रहा है।
-जाँच में पारदर्शिता की कमी: गंभीर आरोपों के बावजूद जाँच प्रक्रिया में देरी सुशासन की कमी को दर्शाती है।
छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में संचालक से लेकर प्राचार्य तक के महत्वपूर्ण पदों पर रिक्तियाँ और प्रभारी व्यवस्था विभाग के सुचारू संचालन में बाधक बन रही हैं। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इन रिक्तियों को तत्काल भरने और पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता है। विभाग को सुशासन और कार्यक्षमता के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
