Saturday, January 24, 2026
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जंगल में मंगल नहीं है : शिकारी के शिकार का शिकार बनी हिरण — वन विभाग की लापरवाही से गई मासूम जान

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घायल अवस्था में तड़पती रही, समय पर मदद नहीं मिली — शुक्रवार को हुआ अंतिम संस्कार

दिलीप देवांगन । जगदलपुर/दरभा

बस्तर की जैव विविधता से भरपूर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में गुरुवार को वन्यजीव संरक्षण की असलियत उस वक्त सामने आ गई जब एक घायल हिरण राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर तड़पती मिली। अज्ञात शिकारी द्वारा तीर मारकर घायल की गई इस हिरण ने वन विभाग की उदासीनता के कारण दम तोड़ दिया। शुक्रवार को स्थानीय लोगों की उपस्थिति में हिरण का अंतिम संस्कार किया गया।

गुरुवार सुबह तीरथगढ़ मार्ग पर ग्रामीणों को एक घायल हिरण दिखाई दी, जिसके शरीर में तीर के गहरे घाव थे। तत्काल लोगों ने वन विभाग को सूचना दी, लेकिन अफसोस की बात है कि वनकर्मी समय पर नहीं पहुंचे और हिरण ने तड़पते हुए प्राण त्याग दिए।

स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि यदि वन अमला समय पर हरकत में आता और घायल हिरण को प्राथमिक उपचार या चिकित्सा सुविधा मिलती, तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन यहां वन विभाग की लचर व्यवस्था और जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी ने एक बेजुबान प्राणी की जान ले ली।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र के अधिकांश वनकर्मी अपने मुख्यालय में नहीं रहते, जिससे इलाके में लकड़ी तस्कर और शिकारी बेखौफ सक्रिय हैं। कांगेर घाटी जैसे संरक्षित क्षेत्र में इस तरह की घटना न केवल वन विभाग की विफलता को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि क्या वास्तव में वन्यजीव संरक्षण केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है?

बस्तर में बरसात के दिनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसे में वन्य प्राणियों की आमद सड़क किनारे या ग्रामीण क्षेत्रों में भी हो जाती है। यह स्थिति वन विभाग से अधिक सतर्कता और तत्परता की मांग करती है, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर संरक्षण व्यवस्था कितनी खोखली है।

अब ज़रूरत है कठोर कार्रवाई की:-
घायल हिरण के मामले में वन विभाग की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
– संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
– क्षेत्र में सक्रिय शिकारियों और लकड़ी तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए।
– वनकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निगरानी प्रणाली लागू हो।
इस दुखद घटना ने बस्तर की खूबसूरत जैवविविधता पर एक काला धब्बा छोड़ दिया है। उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस हादसे से सबक लेकर आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दे।

इस मामले पर कमल तिवारी एसडीओ ने बताया कि दरभा जंगल से घायल अवस्था में NH 30 पर हिरण आ गया था और जब स्टॉफ को पता चला तो मौके पर पहुंच कर जगदलपुर अस्पताल पहुंचाया पर हिरण की मौत हो चुकी थी, हिरण को तीर मार कर घायल किया गया था और तीर बरामद हो गई है, शिकारी की तलाश जारी है और सूचना देने वालों को दस हजार रुपया इनाम दिया जाएगा।

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