Saturday, January 24, 2026
news update
Madhya Pradesh

महाकाल मंदिर में पहली बार गूंजेगा ‘महाकाल बैंड’, दिवाली से पहले आरती में नया रंग

उज्जैन 
भगवान श्री महाकाल का धाम करोड़ों भक्तों की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर में लगभग 300 वर्ष पुरानी सिंधिया परंपरा के साथ अब मंदिर समिति नया अध्याय जोड़ने जा रही है. मंदिर समिति खुद का एक बैंड तैयार करने में जुटी है, जिसे बाबा महाकाल की होने वाली सभी आरती व अन्य आयोजनों के दौरान उपयोग में लिया जाएगा. सिंधिया शासन काल के वक़्त से शहनाई और नगाड़े आरती के दौरान बजाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है.

मंदिर समिति अब भगवान महाकाल की पांचों आरतियों के दौरान विशेष बैंड तैयार करवा रही है. मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिकका कहना है "विशेष प्रकार का बैंड तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे ही काम पूरा हो जाएगा तो सभी को जानकारी साझा की जायेगी कि इसे कब-कहां, कैसे उपयोग में लाया जाना है."

अभी मंदिर में दो बार होता है शहनाई वादन

श्री महाकाल मंदिर में हर रोज आरती के दौरान नगाड़े बजते हैं तो वहीं सुबह भस्म आरती के बाद 06 बजे करीब और शाम में 07 बजे करीब संध्या आरती के आसपास शहनाई वादन की परंपरा है, जोकि लगभग 300 साल पुरानी सिंधिया शासन काल के दौरान शुरू की गई थी. मंदिर समिति के अनुसार जिस बैंड को तैयार किया जाना है, उसके लिए वाद्य यंत्रों की दानदाताओं के माध्यम से खरीदारी शुरू कर दी गई है. साथ ही मंदिर समिति बैंड बजाने के लिए वाद्य वादकों की भर्ती प्राक्रिया भी शुरू करने की तैयारी में है, जिसके लिए संभवतः आउटसोर्स के माध्यम से प्रयास होगा.

बैंड पूरी तरह से धार्मिक परंपरा का हो

श्री महाकाल मंदिर के महेश पुजारीका कहना है "शिव तो आदि अनादि हैं. उन्हें पौराणिक कथाओं में वाद्यों का रचयिता भी कहा गया है. वे नटराज हैं, कलाधर हैं. अगर मंदिर समिति बैंड पर विचार कर रही है और आरती के दौरान व अन्य आयोजन के लिए तो यह एक अच्छा प्रयास है. पुरानी परंपराओं के साथ नई परंपराओं को भी जोड़ना अच्छा है. बस सब कुछ धर्मसंवत् होना चाहिए. बैंड धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग के लिए ही हो."

 

error: Content is protected !!