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बहू ने किया सास का अंतिम संस्कार… बेटा बोला- उनका अधिकार था…

इम्पैक्ट डेस्क.

गुजरात के सूरत शहर की एक 38 वर्षीय बहू ने पारंपरिक प्रथाओं को तोड़ते हुए अपनी सास की चिता को आग देते हुए उनका अंतिम संस्कार किया। दरअसल हिंदू रीति-रिवाजों में पारंपरिक रूप से महिलाओं को श्मशान में प्रवेश करने या दाह संस्कार में हिस्सा लेने की मनाही है, लेकिन सवानी परिवार इस परंपरा को बदलना चाहता था।

एल पी सवानी ग्रुप ऑफ स्कूल्स के संस्थापक मावजी सवानी का परिवार घर की महिलाओं को साथ लेकर उमरा श्मशान में दाह संस्कार के लिए पहुंचा। सवानी की पत्नी वसंतबेन का 67 साल की उम्र में लंबे समय तक लीवर की बीमारी के कारण निधन हो गया था। करीब एक महीने पहले उनका लीवर ट्रांसप्लांट भी हुआ था। मृतका की बेटी भावना ने बहू पूर्वी के साथ मिलकर विद्युत शवगृह में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले दाह संस्कार में हिस्सा लिया। 

यह बोलीं बहू पूर्वी
पूर्वी ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि मैंने पिछले कई सालों से अपनी मां की तरह उनकी सेवा की। इसलिए, मैं उसके अंतिम संस्कार में भी शामिल होना चाहती थी। वहीं वसंतबेन के बेटे धर्मेंद्र सवानी ने कहा, ‘मेरी पत्नी की इच्छा थी कि वह मेरी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो क्योंकि वह पिछले कई हफ्तों से लगातार उनकी सेवा कर रही थी। यह पूर्वी का अधिकार था और परिवार के सभी सदस्य सहमत थे।’

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