RSS chief Mohan Bhagwat

Madhya Pradesh

RSS प्रमुख मोहन भागवत 13 सितंबर को इंदौर में, 8 महीने में चौथा दौरा; पुस्तक विमोचन में होंगे शामिल

इंदौर  RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 13 सितंबर को इंदौर में रहेंगे। सरसंघचालक भागवत का यह इंदौर में साल का चौथा दौरा है। इस बार मोहन भागवत इंदौर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। भागवत 14 सितंबर रविवार शाम तक इंदौर में रहेंगे। रविवार दोपहर 3.15 बजे स्थानीय ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य और कुछ गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। बता दें

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मोहन भागवत ने बताई वजह: क्यों नहीं गए थे RSS चीफ प्रयागराज के महाकुंभ में

नई दिल्ली साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित हुए महाकुंभ में करोड़ों भक्तों ने संगम में स्नान किया। इसमें राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक शामिल थे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत महाकुंभ में स्नान के लिए नहीं पहुंचे। ऐसे में उस समय लोगों ने सवाल भी किया कि आखिर मोहन भागवत महाकुंभ क्यों नहीं गए। अब आरएसएस चीफ भागवत ने खुद इसकी वजह बताई है। उन्होंने कहा है कि हम लोगों को जहां बताया जाता है, वहां जाते हैं। हमें बताया गया था कि

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मोहन भागवत बोले- ‘हिंदू राष्ट्र का सत्ता से कोई लेना-देना नहीं’

नई दिल्ली ऐसे समय में जब देश में हिंदू राजनीति अपने चरमोत्कर्ष की ओर जा रही हो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का मंगलवार को दिया गया भाषण महत्वपूर्ण हो जाता है. भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र शब्द का सत्ता से कोई मतलब नहीं है. भाजपा सरकार पर विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि वह इस विचारधारा को सत्ता पाने और उसमें बने रहने के औजार के रूप में इस्तेमाल करती है. आम तौर पर यह माना जाता रहा है कि संघ बीजेपी को समय समय

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हिंदू समाज को एकजुट होकर मिटाना चाहिए मतभेद : मोहन भागवत

बारां. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को हिंदू समाज से आपसी मतभेदों और विवादों को मिटाकर एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा और प्रांत के आधार पर बंटे समाज को अपनी सुरक्षा और मजबूती के लिए एक होना होगा। भागवत ने इस दौरान समाज में एकता, सद्भाव और अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि समाज का गठन सिर्फ व्यक्तिगत हितों से नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से होता है। भागवत ने कहा, “हमें समाज के प्रति चिंता रखते हुए अपने जीवन

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