फर्टिलिटी रेट की गिरावट एक उपलब्धि, लेकिन भविष्य में भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड एक बोझ बन सकता है
नई दिल्ली एक वक्त था जब भारत को युवा देश कहा जाता था और दुनिया भर में उसकी जनसंख्या वृद्धि चिंता का विषय थी, लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. भारत की जनसंख्या आज भले ही 1.46 अरब (2025 अनुमान) के आंकड़े को छू रही हो, लेकिन देश की प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट साल दर साल गिरती जा रही है. यह बदलाव भारत के भविष्य की सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है. 1950 में भारत की औसत रूप से एक महिला
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