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वास्तु शास्त्र के मंत्र: घर की ऊर्जा बदलने के प्राचीन नियम

वास्तु शास्त्र प्राचीन हिंदू विज्ञान है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद, सामवेद, मत्स्य पुराण, स्कंद पुराण और विश्वकर्मा वास्तु शास्त्र में मिलता है। इसके अनुसार ब्रह्मांड पांच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश और आठ दिशाओं के ऊर्जा-समन्वय पर चलता है। घर में इन तत्वों का संतुलन जीवन में सुख, धन, स्वास्थ्य और समृद्धि लाता है, जबकि असंतुलन को वास्तुदोष कहा गया है। घर में दिशाओं का महत्व वास्तु के अनुसार हर दिशा किसी देवता और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी होती है— पूर्व दिशा: सूर्यदेव – स्वास्थ्य, ऊर्जा, नई शुरुआत उत्तर

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