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डिप्रेशन से सुरक्षा कवच: कॉल और ई-मेल नहीं, ‘सामने की मुलाकात’ है ज़रूरी

डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती आज का समय पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है। हम एक कॉल या ई-मेल पर दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से तुरंत जुड़ सकते हैं। लेकिन क्या यह सुविधा वास्तव में हमारे मन को हल्का कर रही है? हालिया शोध और पुराने अनुभवों से पता चलता है कि जब बात डिप्रेशन (अवसाद) से बचाव की आती है, तो डिजिटल संवाद, चाहे वह फोन कॉल हो या ई-मेल, आमने-सामने की मुलाकात का स्थान नहीं ले सकता। शोध की ताज़ा पुष्टि:

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