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कूनो में चीता ‘मुखी’ ने पांच शावकों को जन्म दिया, भारत में पहला सफल प्रजनन: सीएम मोहन यादव ने दी बधाई

श्योपुर  मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से चीता संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ी खुशखबरी आई है। भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही 33 महीने की उम्र में मुखी अब भारत में जन्म लेने वाली पहली चीता बन गई है, जिसने सफलतापूर्वक प्रजनन किया है। कुनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार, मादा चीता मुखी और उसके नवजात पांचों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह शावक नामीबिया से लाई गई चीता ‘सिया’ (Siyaya) और दक्षिण अफ्रीका

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मुरैना के सबलगढ़ में चीता दिखा, कूनो जंगल से गांव तक आया, सड़क पर ‘राजा’ की तरह चला

मुरैना  सबलगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर चीते की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई है। घाटी नीचे के इलाके सालई गांव में सुबह अचानक सड़क पर एक चीता टहलता हुआ नजर आया। इस नजारे को देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने चीते को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। शावक के होने की आशंका जानकारी के मुताबिक यह वही मादा चीता ‘केपी-1’ का शावक होने की आशंका है, जो कूनो नेशनल पार्क से बाहर

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भारत को चीते भेजने से साउथ अफ्रीका ने भी किया इनकार, जानिए क्या है बड़ी वजह

 भोपाल भारत ने 1947 में चीतों के विलुप्त होने के बाद सितंबर 2022 में मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना शुरू की थी। इस परियोजना के तहत नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया। लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका ने नए चीतों की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी है। इससे पहले केन्या ने भी चीतों के भेजने से इनकार किया था। क्या है दक्षिण अफ्रीका की चिंता Read moreमहाकाल मंदिर में भक्त की जेब से 11 हजार रुपये चोरी, सीसीटीवी में

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मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को लगा झटका, कूनो नेशनल पार्क में माता चीता नभा की हुई मौत

श्योपुर  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दुखद खबर सामने आ रही है. नामीबिया से लाई गई मादा चीता नभा की मौत हो गई है. जिसकी जानकारी कूनो के द्वारा दी गई है. कूनो प्रबंधन ने बताया कि नामीबिया की 8 वर्षीय मादा चीता नभा की आज शनिवार को मौत हो गई. वह एक हफ्ते पहले अपने सॉफ्ट रिलीज बोमा के अंदर घायल अवस्था में पायी गई थी. क्या शिकार के दौरान घायल हुई चीता नभा संभवतः वह शिकार के प्रयास के दौरान घायल हुई थी. अन्य चोटों के

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कूनो जंगल में चीता को गर्मी से बचाने का गजब का उपाय, शावकों की मिली नई जिंदगी!

श्योपुर  इस गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली है। यह है सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम। इसने उन्हें भीषण गर्मी और कठोर परिस्थितियों से बचने में मदद की है। जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। इससे पानी के स्रोतों पर बहुत दबाव पड़ा। मई 2023 में, नामीबियाई चीता ज्वाला के तीन शावकों की अत्यधिक गर्मी के कारण राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में मौत हो गई थी। उस अनुभव

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फिर कूनो की सीमा से बाहर निकल गए हैं चीते, धीरा चीता गर्भवती, कुनबा बढ़ने की संभावना

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों ने एक बार फिर अभयारण्य की सीमा से बाहर चले गए हैं। कल रात पांच चीतों का समूह पार्क से बाहर निकल गया था। इसे बाद आज सुबह ये शिवपुरी जिले के पोहरी तक पहुंच गए हैं। चीतों को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई है। चीता धीरा गर्भवती, पखवाड़े भीतर कुनबा बढ़ने की संभावना कूनो नेशनल पार्क में एक और मादा चीता धीरा गर्भवती है। अगले एक पखवाड़े में उसके संभावित प्रसव से यहां शावकों

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कूनो के चीतों की होगी शिप्टिंग, 300 किलोमीटर दूर हो जा रहे, खाने को मिलेंगे चिंकारा, नीलगाय और चीतल

मंदसौर  मध्य प्रदेश में चीतों को बसाने की योजना में एक नया मोड़ आया है। केंद्र सरकार केन्या, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से और चीते लाने की बात कर रही है। वहीं, कुछ चीतों को कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भेजने की मंजूरी मिल गई है। समिति ने यह भी कहा है कि चीतों को सड़क मार्ग से ले जाते समय गर्मी जैसे तनाव देने वाले कारकों का ध्यान रखा जाए। 300 किलोमीटर है दोनों जगह के बीच की दूरी गांधी सागर, कुनो से लगभग 300

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कूनो नेशनल पार्क के चीतों की इंसानों से दोस्ती का नया अध्याय शुरू, ग्रामीण ने बर्तन में रख पानी पिलाया

श्योपुर  अगर आपका सामना शेर, तेंदुआ या फिर चीते से हो जाए तो क्या होगा. सुनकर ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस भीषण गर्मी में चीतों के झुंड को पानी पिलाए तो इसे पशुओं से बेइंतहा प्रेम कहें या फिर दुस्साहस. ये कहानी कोई काल्पनिक नहीं है. बल्कि सच है. कूनो नेशनल पार्क के चीते शिकार करने के बाद छांव में बैठे हुए थे. इन्हें भीषण गर्मी में पानी की सख्त जरूरत थी. लेकिन आसपास पानी नहीं था. पेड़ की छांव में बैठे 6

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कूनो नेशनल पार्क से छोड़ी गई अग्नि चीता श्योपुर के अंदर पहुंची, कुत्ते का किया शिकार

 श्योपुर कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल से निकलकर 90 किलोमीटर दूर श्योपुर के नजदीक पहुंचे चीते ने चार दिनों बाद शहर के रास्ते वापस जंगल की ओर रवानगी ले ली है. खास बात यह है कि चीता जंगल लौटते समय आधी रात को शहर की सड़कों पर दौड़ लगाता कैमरे में कैद हुआ है. अब चीता वापस जंगल की ओर रुख कर गया है. बताया जा रहा है कि वह अब कूनो के बफर जोन में जा पहुंचा है. पिछले शनिवार को कूनो की हद छोड़ 90 किलोमोटर की

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चीता कॉरिडोर के विकास के लिए मध्य प्रदेश-राजस्थान ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया

भोपाल मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने और चीता कॉरिडोर के विकास के लिए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति चीता के संरक्षण, पर्यटन संभावनाओं और क्षेत्रों के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाएगी। साथ ही, यह हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सौंपेगी। इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक होंगे। अन्य सदस्य के रूप में चीता प्रोजेक्ट के

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साल के अंत तक गांधीसागर अभयारण्य में आ सकते हैं चीते, तैयारी हुई तेज

मंदसौर  अब सबकुछ ठीक रहा तो साल के अंत में गांधीसागर अभयारण्य में चीते आ जाएंगे। इसके साथ ही देश में कूनो के बाद गांधीसागर अभयारण्य चीतों के दूसरे घर के रूप में पहचाना जाएगा। यहां बड़े घास के मैदान, पानी, कंदराएं सभी कुछ चीतों के लिए मुफीद हैं। अभयारण्य भी उनके स्वागत के लिए तैयार है। अभी चीतों के लिए हिरण, चीतल को यहां लाने का काम भी फिर से शुरू हो गया है। 1250 हिरण-चीतल लाने हैं और अभी तक 434 ही पहुंचे हैं।अभयारण्य में 6400 हेक्टेयर में

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कूनो नेशनल पार्क में बड़े बाड़े से दो-दो करके छोड़े जाएंगे चीते

शिवपुरी देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे। उन्हें बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़े जाने की स्वीकृति चीता स्टीयरिंग (संचालन) कमेटी से मिल गई है। दो-दो की संख्या में चीतों को छोड़ा जाएगा। इसके बाद स्थिति को देखते हुए अन्य चीतों और शावकों को भी खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। चीतों को छोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि चीते समीपस्थ राज्यों में भी स्वच्छंद विचरण कर सकेंगे। इनके भोजन, सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित

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मध्य प्रदेश के कूनो जंगल में अब आजाद होंगे चीते, यूपी और राजस्थान भी जा सकेंगे

श्योपुर  कूनो नेशनल पार्क में रह रहे चीतों के साम्राज्य में अब विस्तार होगा। उन्हें जल्द ही खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके बाद वह मध्य प्रदेश ही नहीं, यूपी और राजस्थान में भी छुट्टा घूमेंगे। वो जब चाहे तब जंगल में खुद से लौंटेगे लेकिन उन्हें ट्रैंकुलाइज नहीं किया जाएगा। यह निर्णय तीन राज्यों के वन विभाग के अधिकारियों की हुई मीटिंग में लिया गया है। एमपी, यूपी और राजस्थान के 27 जिलों में चीते घूम सकेंगे। तीन राज्य के अधिकारियों ने की प्लानिंग कूनो नेशनल पार्क में अभी

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कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी शुरू करने की कोशिशों को फिलहाल झटका लगा

ग्वालियर देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी शुरू करने की कोशिशों को फिलहाल झटका लगा है। चीते फिलहाल खुले जंगल में नहीं छोड़े जाएंगे। इसकी बड़ी वजह, हाल ही में हुई चीता पवन की मौत है। कूनो प्रबंधन इसको लेकर चिंतित है। अलबत्ता भारत की धरती पर चीते लाए जाने की दूसरी वर्षगांठ 17 को मनाई जाएगी। सेसईपुरा में इस मौके पर कार्यक्रम होंगे। नामीबिया से भारत लाए गए चीतों को दो वर्ष पूरे होने जा रहे हैं लेकिन वन्यप्राणियों के लिए उनका दीदार अभी

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केन्या से आए छह सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने गांधीसागर का निरीक्षण किया, गांधीसागर में जल्द आएंगे चीते

 मंदसौर  भारत सरकार की चीता पुनर्स्थापना योजना के अंतर्गत गांधीसागर अभयारण्य में चीते बसाने की तैयारी अब तेजी से पूरी हो रही है। अब तक हो चुकी तैयारियां पर्याप्त मानी जाती हैं तो जल्द ही गांधीसागर अभयारण्य में चीते दौड़ते दिखेंगे। तैयारियों को देखने केन्या से आए छह सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने गांधीसागर का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने 6400 हेक्टेयर में बने बाडे, क्वारंटाइन बाड़ों, हाई मास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारियां देखीं। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के दल ने भी

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